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चौकिए मत..हाल मस्त तो चाल मस्त..सम्पूर्ण बिहार में प्रयोग एवं प्रयोगशाला कागज के यंत्र पर ही चल रहे हैं..

संजय भारती , समस्तीपुर।

शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार नित्य कर रहे हैं बदलाव । लेकिन बिहार के विद्यालय एवं महाविद्यालयों में कागज पर ही बनता है पानी , बिजली एवं जीव जन्तु । शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए जहाँ केन्द्र सरकार जापान एवं अमेरिका की व्यवस्था का अनुशरन कर नित्य बदलाव कर रहे हैं ।

वहीँ राज्य सरकार दरभंगा जैसी छोटे शहर में तारामण्डल लगा रहे हैं । राज्य के विद्यालय एवं महाविद्यालयों में आधारभूत संरचना का निर्माण भी हुआ है । राज्य के विद्यालयों में प्रयोगशाला भी और उसके लिए शिक्षक भी निर्धारित रहते हैं , पर राज्य के विद्यालयों में यह क्या हो रहा है सम्पुर्ण बिहार में प्रयोग एवं प्रयोगशाला का काम कागज पर ही हो रहा है । चौंकिए नहीं..बिहार के विद्यालय में छात्र कागज पर ही बिजली , पानी एवं जीव जन्तु की उत्पत्ति कर रहे हैं ।जिसके लिए सत्ता के शीर्ष से लेकर अर्श से फर्श तक सब के सब वाकिफ हैं । लेकिन शिक्षा व्यवस्था के इस गोरखधन्धे में सब के सब मस्त है । छात्र जहाँ बिन प्रयोग के अंक प्राप्त करते हैं तो वहीं शिक्षक बिना कोई प्रायोगिक कराये छात्रों को अंक देकर मस्त बना देते हैं । फलतः प्रायः संपुर्ण बिहार इस रोग से ग्रसित हो गया है । कोई हाल मस्त , कोई चाल मस्त में सब के सब मस्त हैं अपनी मस्ती में..। आँखें तो है पर दिखाई नहीं देता..। लेकिन शिक्षा को लेकर सब इसी तरह मस्त रहें तो विश्व गुरु बनने एवं मेक इन इण्डिया का सपना मुंगेरीलाल के हसीन सपने बन कर रह जाएगा । देश का जो विश्व गुरु का सपना है उसके लिए छात्र , शिक्षक , अविभावक एवं शासन व्यवस्था को आपसी ताल मेल बिठा कर काम करना होगा । अन्यथा आधारभूत संरचना , प्रयोगशाला , नित्य बन रहे शिक्षा नीति ढ़ाक के तीन पात ही साबित होगा । कुछ अच्छा करने के लिए सख्त निर्णय लेना पड़े तो लेना चाहिए । नहीं तो भविष्य में सरकार का काल खण्ड पर लोगों को आंसू बहाना पड़ेगा । जिसका हम सब नागरिक जिम्मेदार होगें ।

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