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उल्लू को भी जीने का व कहीं भी रहने का है अधिकार : DFO..

खगड़िया, बिहार दूत न्यूज।

भारतीय वन्य जीव अधिनियम 1972 की अनुसूची एक के तहत उल्लू संरक्षित है। इसे विलुप्तप्राय जीवों की श्रेणी में रखा गया है,जिसके शिकार और तस्करी पर प्रतिबंध है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने इस मामले में बिहार के सभी डीएम और एसपी को अलर्ट भेज दिया है।

बिहार सरकार उल्लू के संरक्षण को लेकर काफी गंभीर है। उक्त जानकारी देते हुए बिहारी पॉवर ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ अरविन्द वर्मा ने मीडिया से कहा विभागीय नियमानुसार उल्लू पकड़ने और शिकार करने वालों पर कानूनी कार्रवाई और आरोपित को जेल की सजा काटनी होगी। गांधी नगर मोहल्ले में जो प्रवासी पक्षी दिखाई दिया, जिसकी ख़बर प्रकाशित होते ही वन विभाग के अधिकारियों पर असर पड़ा। डिविजनल फॉरेस्ट ऑफ़िसर, बेगुसराय आर. के. रवि ने न्यूज़ में प्रकाशित प्रवासी फ़ोटो देखकर बिहारी पॉवर ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ अरविन्द वर्मा को सूचित किया कि समाचार में वर्णित पक्षी का फोटो “उल्लू” है। इसे जहां है रहने दिया जाय, इसे भी जीने का, कहीं भी रहने का अधिकार है। कोई इसके साथ छेड़छाड़ या मारने की कोशिश करेगा तो उन पर विभागीय कार्रवाई तथा जेल भी हो सकता है। यह पूछने पर की कौन सी प्रजाति की उल्लू है ? जबाब में बोले इसकी जानकारी भौतिक निरीक्षण के बाद ही दी जा सकती है। बिहारी पॉवर ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ अरविन्द वर्मा ने सदर अनुमंडल पदाधिकारी, खगड़िया अमित अनुराग को भी जानकारी दिया कि पक्षी की रेस्क्यू के लिए अभी तक वन विभाग की टीम पक्षी आवास स्थल पर नहीं पहुंची। इसपर अनुमंडल पदाधिकारी अमित अनुराग ने व्हाट्सएप पर सूचित किए कि मैंने ओ एस डी को जानकारी दे दिया है। अब देखना है, कब तक पक्षी का रेस्क्यू होता है ?

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