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तम्बाकू खाने से ओरल कैंसर होने का होता है खतरा..

बिहार दूत न्यूज, पूर्णिया।

राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल में संचालित कैंसर स्क्रीनिंग सेंटर में शनिवार को तम्बाकू मुक्त शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में तम्बाकू से ग्रसित लोगों को तम्बाकू से होने वाले मुँह के कैंसर (ओरल कैंसर) की जानकारी दी गई। इसके साथ ही सभी तंबाकू ग्रसित लोगों को तम्बाकू की लत दूर करने के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी गई । शिविर का उद्घाटन जिला गैर संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. वी. पी. अग्रवाल द्वारा किया गया। इसमें कैंसर स्क्रीनिंग
सेंटर के सायकोलॉजिस्ट डॉ. पल्लव और डीटीओ डॉ. हर्षिता चौहान द्वारा लोगों को तम्बाकू लत को दूर करने के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी गई। शिविर में कुल 25 लोगों ने भाग लिया।

तम्बाकू के लत को दूर करने के तरीकों की दी गई जानकारी

डीटीओ डॉ. हर्षिता चौहान ने बताया कि तम्बाकू ग्रसित लोगों को जब तम्बाकू खाने का मन करता है तो इसे दूर करने के लिए पांच तरह से प्रयास किया जा सकता है। पहले प्रयास में तम्बाकू सेवन में देर करना। तम्बाकू खाने की धुन सिर्फ 10 मिनट तक कायम रहती है। इस दौरान मरीज को बहुत बेचैनी होती है। इसे 10 मिनट तक दूसरे कार्यों में व्यस्त किया जा सकता है जिससे तम्बाकू खाने की धुन खत्म हो सकती है। दूसरे प्रयास के रूप में मन को दूसरे कारणों में विचलित करना है। जैसे अगर लोग टीवी देख रहे हैं तो उसे छोड़कर बाहर टहलने निकल जाएं। इससे मन तम्बाकू उपयोग करने से विचलित हो सकता है और आप तम्बाकू सेवन से परहेज कर सकते हैं। तीसरे प्रयास के रूप में पानी पीना चाहिए। पानी पीने से तम्बाकू खाने की तलब को आराम मिलता है। चौथे प्रयास के रूप में गहरी सांस लेनी चाहिए। इससे मरीज को बहुत हल्का महसूस होता है। और पांचवे प्रयास के रूप में तम्बाकू से होने वाले नुकसान की अन्य लोगों से चर्चा करना है। अन्य लोगों से तम्बाकू से होने वाले नुकसानों की चर्चा करने से तलब में कमी आती है। इन तरीकों का इस्तेमाल कर लोग अपने तम्बाकू सेवन की लत को कमजोर कर सकते हैं जो धीरे धीरे तम्बाकू उपयोग करने से रोक सकता है।

तम्बाकू खाने से ओरल कैंसर ग्रसित होने का होता है खतरा

जिला गैर संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. वी. पी. अग्रवाल ने बताया कि तम्बाकू के नियमित सेवन से लोग मुँह के कैंसर (ओरल कैंसर) का शिकार हो सकते हैं। ज्यादा तम्बाकू के सेवन से लोगों के मुँह में छाले या सफेद दाग होने लगते हैं। इसके अलावा कुछ तीखा खाने से मुँह में जलन होना, मुँह के खुलने में परेशानी होना आदि भी ओरल कैंसर होने के लक्षण होते हैं। शिविर में ओरल कैंसर से संबंधित घाव की तस्वीरें दिखाई गई और बताया गया कि अगर वे लोग भी तम्बाकू खाते रहेंगे तो उन्हें भी कल होकर इस तरह के घावों का सामना करना होगा।

तम्बाकू उत्पादों का सेवन रोकने के लिए सरकार द्वारा तम्बाकू नियंत्रण अधिनियम (कोटपा) किया गया है लागू

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि तंबाकू की लत बहुत ही ज़्यादा खराब होती है। अगर कोई व्यक्ति इसका शिकार हो जाता है तो फिर इससे निकलना बेहद मुश्किल होता हैं। लेकिन अगर कोई व्यक्ति इससे निकलना चाहे तो इसके लिए उन्हें चिकित्सकीय उपचार से ज्यादा मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। मजबूत इच्छाशक्ति के साथ चिकित्सकीय उपचार, परिवार, सहयोगियों के अलावा आसपास के लोगों के सहयोग से तंबाकू सेवन की लत से बाहर निकला जा सकता है। तंबाकू उत्पादों का सेवन सार्वजनिक स्थलों पर रोकने के लिए सरकार द्वारा कानून बनाया गया है। इसके लिए तंबाकू नियंत्रण अधिनियम कोटपा लागू किया गया है। कोटपा के तहत तंबाकू इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने पर लोगों को धारा 4, 5, 6 तथा 7 के तहत कानूनी कार्रवाही व आर्थिक दंड वसूला जा सकता है जो निम्नलिखित हैं :
-सार्वजनिक स्थलों या आसपास धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों को धारा-4 के तहत 200 रुपये की जुर्माना देय होगी।
-तंबाकू पदार्थों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर धारा-5 के तहत 01 से 05 साल तक की कैद एवं 1000 से 5000 रूपये तक का जुर्माना देय होगा।
-18 वर्ष या इससे कम आयु वर्ग के अवयस्कों को धारा-6 के तहत तंबाकू पदार्थ बिक्री करने वालों को 200 रुपये जुर्माना लगाया जाता है।
-धारा-7 के अनुसार, बिना चित्रित व पैकेट के 85% भाग पर मुख्य रूप से न छपे वैधानिक चेतावनी के तंबाकू पदार्थों की बिक्री पर 02 से 05 साल की कैद एवं 1000 से 10000 रूपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

तम्बाकू ग्रसित लोगों ने भी अपने अनुभव साझा किये

कैंसर स्क्रीनिंग सेंटर के सायकोलॉजिस्ट डॉ. पल्लव ने तम्बाकू ग्रसित लोगों को बताया कि तम्बाकू में होने वाले निकोटिन किस तरह से लोगों के दिमाग पर असर करता है और क्यों लोगों को तम्बाकू सेवन की तलब होने लगती है। उन्होंने कहा कि तम्बाकू ग्रसित लोगों के आसपास के वातावरण से भी इसके इस्तेमाल की आदत पड़ जाती है। तम्बाकू मुक्त होने के लिए लोगों को अपने आसपास के माहौल में भी बदलाव लाने की जरूरत है। तम्बाकू मुक्त होने के लिए लोगों को अपनी संगति/दोस्ती में भी बड़ा बदलाव करने की जरूरत है। जिसके साथ लोग तम्बाकू खाने के आदि हो गए हैं उनसे दूर रहना सबसे आवश्यक है। ऐसा करने से लोगों को तम्बाकू छोड़ना बहुत आसान हो जाएगा। शिविर के अंत में तम्बाकू ग्रसित लोगों ने भी अपनी परेशानियां बताई कि उन्हें तम्बाकू नहीं खाने पर कैसा महसूस होता है। मरीजों के ऐसे सभी सवालों का चिकित्सकों द्वारा उपयुक्त जवाब दिया गया जिसके इस्तेमाल से लोग तम्बाकू की लत को कम कर सकते हैं।

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