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विश्व नर्स दिवस पर विशेष: दुर्गम क्षेत्रों में शत प्रतिशत कोविड टीकाकरण में महती भूमिका निभाने वाली एएनएम गीता के जज्बे को सलाम..

नर्सों का मनोबल बढ़ाने के लिए समय-समय पर किया जाता है प्रोत्साहित: सिविल सर्जन

अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को टीकाकरण के लिए कई बार समझाने के बाद मिली थी सफलता: गीता

पूर्णिया, बिहार दूत न्यूज।
वैश्विक महामारी कोरोना काल की बातें या चर्चाएं शुरू होती है तो आम से लेकर खास तक की जुबां पर स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों एवं नर्सों का ख्याल सबसे पहले आ जाता है।

क्योंकि इन्हीं लोगों की बदौलत न जाने कितने की ज़िंदगी वापस लौटी होगी। बायसी सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विजय कुमार का कहना है कि कोरोना संक्रमण के दौरान अपनी जिंदगी की चिंता छोड़ कोविड-19 टीकाकरण में अपनी जिम्मेदारियों को शत प्रतिशत सुनिश्चित करने में जिले के स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एएनएम गीता कुमारी आगे रहीं। उन्होंने दुर्गम क्षेत्रों में जाकर शत प्रतिशत टीकाकरण जैसे कार्यो में महती भूमिका निभायी। जिसके लिए एएनएम गीता कुमारी को उत्कृष्ट कार्य करने को लेकर राज्य सरकार द्वारा विगत दिनों प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है। गीता की नियुक्ति सितंबर 2019 में जिले के बायसी में हुई थी। उसके पहले गृह जिले मुजफ्फरपुर के मीनापुर में 2007 से लेकर अगस्त 2019 तक अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।

 

नर्सों का मनोबल बढ़ाने के लिए समय-समय पर किया जाता है प्रोत्साहित: सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि एक अच्छी नर्स के द्वारा मरीज़ों का लगातार ध्यान देना उतना ही महत्वपूर्ण होता है, जितना कि एक विशेषज्ञ सर्जन के द्वारा किसी भी ऑपरेशन के दौरान अपनी जिम्मेदारियों को निभाया जाना है। आने वाले वर्षों में वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने के लिए नर्सिंग सेवा से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। जिले की जीएनएम एवं एएनएम को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए समय-समय पर प्रोत्साहित किया जाता है ताकि उनलोगों का मनोबल बढ़ते रहे।

 

अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को टीकाकरण के लिए कई बार समझाने के बाद मिली थी सफलता: गीता
एएनएम गीता कुमारी ने बताया कि बायसी सीएचसी मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर मड़वा स्वास्थ्य उप केंद्र पर प्रतिनियुक्ति हुई है। जहां 12 साइट के अंतर्गत 08 आंगनबाड़ी केंद्र एवं 04 नियमित टीकाकरण सत्र स्थलों पर कार्य करना पड़ता है। इसके अंतर्गत महानन्दा नदी के उस पर दक्षिणी छोड़ पर लेलुका गांव जाना पड़ता जहां आने जाने के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं है। लेकिन अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए नदी पार करना पड़ता है। ताकि वंचित क्षेत्र के निवासियों को शत प्रतिशत टीकाकरण के अलावा सभी तरह की सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। मड़वा एचएससी जैसे अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में कोविड-19 के दौरान टीकाकरण करना बहुत ज्यादा मुश्किल था लेकिन किसी तरह से समझाने के बाद शत प्रतिशत टीकाकरण कार्य संपन्न कराया गया। किसी किसी परिवार में पांच से छः बार जाकर समझाना पड़ा था। तब जाकर कोरोना का टीकाकरण कराने में सफ़लता मिली थी।

 

महानंदा नदी को पैदल पार करने में लगभग एक घंटे का लगता है समय: एएनएम
गीता ने आगे बताया कि महानंदा नदी के उस पार जाने के लिए पैदल जाने के अलावा कोई साधन नहीं है। जिस कारण नदी की लंबी दूरी तय करने के बाद उस पार जाना पड़ता है। क्योंकि लगभग 800 सौ की आबादी वाले इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मेरे सिवाय कोई जाता नहीं है। साथ में आंगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता भी कम से कम एक घंटे का सफर तय करती हैं। अब एएनएम अनिशा कुमारी की तैनाती हुई है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण पैदल के अलावा आवागमन का कोई भी साधन नहीं है। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण काल के दौरान सभी लोग अपने-अपने घरों में रहते थे लेकिन हमलोग क्षेत्रों का भ्रमण कर उनलोगों को बचाव एवं सुरक्षित रहने को लेकर जागरूकता अभियान चलाया करते थे।

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