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समस्तीपुर कालेज समस्तीपुर में प्राचार्य के प्रभार को लेकर छात्रों में आक्रोश

बिहार दूत न्यूज़, समस्तीपुर ।

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समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर में शैक्षणिक वातावरण पुनः बिगड़ने की संभावना प्रबल होती दिखाई दे रही है, क्योंकि उक्त कॉलेज में कुलपति एवं राज भवन के आदेश के विपरित प्रभारी प्राचार्य एवं केन्द्राधीक्षक का प्रभार कनीय प्राध्यापक को दिया जाने लगा है । फलत: महाविद्यालय का पठन-पाठन बुरी तरह से प्रभावित होना शुरू हो गया है । छात्रों में पुनः वही दहशत व्याप्त हो गया है । दरभंगा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के रजिस्टार ने समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर में बलराम भगत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ वीरेंद्र चौधरी को पदस्थापन किया था और समस्तीपुर जिले के सीनियर केमिस्ट्री विभाग के अध्यक्ष को मिथिला विश्वविद्यालय ने स्थानांतरण कर कनीय प्राध्यापक को प्रिंसिपल बनाने के मामले को बिहार सरकार के डायरेक्टर रेखा कुमारी द्वारा और सरकार के संज्ञान में आने के बाद पुनः ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय द्वारा के पी यादव को केमेस्ट्री विभाग का प्रभार दिया गया । समस्तीपुर के प्राचार्य को अपने अनुपस्थिति में वरीय शिक्षक डॉक्टर के पी यादव को प्रभार में रहने का एक आदेश निर्गत किया था । जैसा कि चर्चा है कि साइकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर सत्यम कुमार को प्राचार्य का प्रभार दिए जाने से छात्रों में आक्रोश धीरे धीरे बढ़ता जा रहा है । छात्रों में यह भी चर्चा का विषय है कि समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर में बनाये गए शौचालय में फर्जी निकासी किये जाने का आरोप उन पर है । इसके साथ ही सरकारी राजस्व की गबनको छुपाने के लिए सत्यम कुमार को पुनः प्राचार्य बनाये जाने की कारवाई की गई है । उल्लेखनीय है कि समस्तीपुर जिला में उमा कॉलेज पुसा, आरबी कॉलेज, बलिराम भगत महाविद्यालय, ए एन डी कॉलेज पटोरी, वूमेन’एस कॉलेज समस्तीपुर समेत कई अंगीभूत कॉलेज में पिछले 8 वर्षों से बड़े पैमाने पर फर्जी निकासी कर भ्रष्टाचार की गई है । हालांकि फर्जी निकासी का भी मामला धीरे धीरे तूल पकड़ता जा रहा है । ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के तहत समस्तीपुर, बेगूसराय, दरभंगा और मधुबनी में भी इस तरह के शिकायत है इस पर विभिन्न छात्र संगठन के नेताओं ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से निगरानी विभाग से जांच कराने की मांग की है । छात्रों का कहना है कि डॉक्टर सत्यम कुमार पर शुरू से ही भ्रष्टाचार के आरोप लगते आ रहा है बावजूद इनको किस परिस्थिति में प्रभारी प्राचार्य बनाया गया है । अब देखना यह है कि बिहार सरकार एवं राजभवन इस पर कोई कार्रवाई करती है अथवा लीपा पोती कर भ्रष्टाचार करने का खुली छूट देती है यह आने वाला वक्त ही तय करेगा हालांकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इनको प्रभारी प्राचार्य बनाए जाने से छात्रों में आक्रोश है ।

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