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छुआछूत से नहीं, मच्छरों के काटने से होता है फाइलेरिया

कटिहार, बिहार दूत न्यूज।

फाइलेरिया से ग्रसित मरीजों को संक्रमित अंग को नियंत्रित रखने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, डंडखोरा में कैम्प आयोजित कर एमएमडीपी किट्स का वितरण किया गया। इस दौरान मरीजों को किट्स के उपयोग की जानकारी देते हुए फाइलेरिया ग्रसित अंगों को सुरक्षित रखने और उपचार के लिए नियमित एक्सरसाइज एवं अस्पताल में उपलब्ध मेडिकल सुविधाओं का उपयोग करने की जानकारी दी गई। साथ ही मरीजों को स्थानीय अन्य लोगों को फाइलेरिया से सुरक्षित रहने के लिए जागरूक कर ग्रसित मरीजों की पहचान कर अस्पताल से लिंकअप करने के लिए जागरूक किया गया। आयोजित कैम्प में प्रखंड के 27 फाइलेरिया ग्रसित मरीजों में  एमएमडीपी किट्स वितरित की गयी। किट्स में उपलब्ध सुविधाओं के इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। इस दौरान प्रखंड स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार, बीएचएम कुमारी अन्नू, बीसीएम पूजा रॉय, भीबीडीएस रूपेश कुमार, सीफार डीसी पल्लवी कुमारी, एडीसी अमन कुमार, बीसी भीम कुमार मंडल सहित फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के जागरूकता अभियान में शामिल फाइलेरिया ग्रसित नेटवर्क मेंबर उपस्थित रहे।

एमएमडीपी किट्स में मिली मलहम व सफाई सामग्री :

मरीजों को एमएमडीपी किट्स के रूप में फाइलेरिया बीमारी को नियंत्रित रखने के लिए जरूरी मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसमें टब, मग, साबुन, तौलिया, रुई व मलहम दी गई है। वितरण के बाद मरीजों को इसके उपयोग के लिए विशेषज्ञ द्वारा प्रशिक्षण भी दिया गया। भीबीडीएस रूपेश कुमार ने बताया कि फाइलेरिया ग्रसित अंगों का पर्याप्त उपचार नहीं किया जा सकता लेकिन उसे नियंत्रित रखा जा सकता है। इसके लिए मरीजों को नियमित रूप से फाइलेरिया ग्रसित अंगों की साफ-सफाई करनी चाहिए और वहां मलहम लगानी चाहिए। फाइलेरिया ग्रसित अंगों में हुई सूजन को कम करने के लिए मरीजों को नियमित रूप से एक्सरसाइज करनी चाहिए। इससे सूजन को नियंत्रित रखने में सहायता होती है। नियमित रूप से किट्स का उपयोग करने और एक्सरसाइज करने से मरीज एक्यूट अटैक से सुरक्षित रह सकते हैं। जिससे उन्हें सामान्य जीवनयापन में कोई तकलीफ नहीं होगी।

नेटवर्क मेम्बर के द्वारा मरीजों को नियमित इलाज के लिए किया जा रहा जागरूक :

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि फाइलेरिया के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप का संचालन किया जा रहा है। इसमें अलग अलग क्षेत्रों में फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को मिलाकर ग्रुप बनाई गई है। इस ग्रुप की हर माह मासिक बैठक आयोजित की जाती है जहां मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी लेते हुए उन्हें उपचार के लिए आवश्यक दवाइयां लेने व एक्सरसाइज करने के लिए जागरूक किया जाता है। इसके साथ ही उनके द्वारा क्षेत्र में अन्य फाइलेरिया मरीजों की पहचान करते हुए उन्हें स्वास्थ्य व्यवस्था से लिंकअप करते हुए मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। फाइलेरिया ग्रसित नेटवर्क मेंबर द्वारा हीं अन्य फाइलेरिया मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देते हुए उन्हें अस्पताल से लिंक कराया जाता है। जिससे कि संबंधित मरीजों को समय पर आवश्यक दवाई व उपकरण उपलब्ध हो सके। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि एमएमडीपी किट्स वितरण के लिए दुवासय पंचायत के नेटवर्क मेम्बर चमरु यादव द्वारा 05 से अधिक मरीजों को अस्पताल लाया गया। उसी तरह डंडखोरा पंचायत से बभनी देवी द्वारा और भमरैली पंचायत से भी नेटवर्क मेंबर जनार्दन यादव द्वारा मरीजों को जानकारी देकर एमएमडीपी किट्स उपलब्ध करवायी गयी। इसके साथ ही बहुत से नॉन पीएसजी फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को जानकारी देकर अस्पताल में एमएमडीपी किट्स उपलब्ध करायी गयी।

छुआछूत से नहीं, मच्छरों के काटने से होता है फाइलेरिया :

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. जे. पी. सिंह ने बताया कि फाइलेरिया बीमारी क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला रोग है, जो ग्रसित मरीजों को 5 साल बाद पता चलता है। अगर मरीज शुरुआत से ही फाइलेरिया ग्रसित अंग का ध्यान रखे तो वे ज्यादा संक्रमित होने से सुरक्षित रह सकते हैं। इसके लिए मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों के साथ फाइलेरिया ग्रसित अंगों की साफ सफाई व एक्सरसाइज नियमित रूप से करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया बीमारी छुआछूत से नहीं होता है। अगर परिवार का कोई सदस्य फाइलेरिया ग्रसित है तो उसके साथ बैठने, खाने से सामान्य व्यक्ति फाइलेरिया ग्रसित नहीं हो सकते। अगर क्यूलेक्स मच्छर ग्रसित मरीज को काटने के बाद सामान्य व्यक्ति को काटती है तो वे फाइलेरिया ग्रसित हो सकते हैं। इससे सुरक्षित रहने के लिए लोगों को नियमित मच्छरदानी का उपयोग करते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा साल में एक बार चलाये जा रहे सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम के तहत आवश्यक गोलियों का सेवन करना चाहिए। नियमित पांच साल तक एमडीए दवा के सेवन से लोग फाइलेरिया ग्रसित होने से सुरक्षित रह सकते हैं।

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