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महात्मा फुले सामाजिक न्याय के अग्रदूत थे: शास्त्री

खगड़िया, बिहार दूत न्यूज।

सदर प्रखण्ड के नन्हकू मंडल टोला स्थित मेनका-कार्तिकेय सदन के सभा कक्ष में विचारक,चिंतक, लेखक, दार्शनिक एवं महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिवा फुले की 133 वीं पुण्यतिथि मनायी गई जिसकी अध्यक्षता दलित युवा संग्राम परिषद् के प्रदेश अध्यक्ष व जदयू प्रवक्ता आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने की।

जबकि मंच संचालन उत्क्रमित उच्च विद्यालय नन्हकू मंडल टोला के संस्कृत शिक्षक हीरालाल शास्त्री ने किया। सर्व प्रथम उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों व छात्र-छात्राऐं के द्वारा महात्मा ज्योतिवा फुले के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया गया और उनके नाम का गगनभेदी जयकारे लगाये गये।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने कहा कि महात्मा ज्योतिवा फुले साहब जहां जातिवाद, धर्मांधता,छुआ-छूत, अंधविश्वास, पाखण्डवाद,बाल विवाह, सती प्रथा,मुर्ति पूजा आदि सामाजिक कुप्रथा व अंधश्रद्धा की मकर जाल से समाज को मुक्त कराने के लिए अदम्य साहस का परिचय दिया वहीं गरीब वंचित समाज को समान अधिकार दिलाने, विधवा विवाह प्रचलन चलाने ,महिला सशक्तिकरण और बालिका शिक्षा के लिए अद्वितीय कृति आज भी प्रासंगिक है।वे वास्तव में सामाजिक न्याय के अग्रदूत थे; जिन्होंने सत्यशोधक समाज की स्थापना कर समता-समानता के लिए आवाज बुलंद करते रहे।उनके विचारों से प्रभावित होकर बाबा साहब डॉ भीम राव अम्बेडकर ने उन्हें अपना गुरू माने थे।
उन्होंने कहा कि आज हमारे आदरणीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी महात्मा फुले साहब के विचारों को आत्मसात कर सूबे बिहार में बालिका शिक्षा में जबरदस्त क्रांति लाये हैं फलस्वरूप लड़कियां हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं ।बाल विवाह उन्मूलन कार्यक्रम चला रहे हैं।विधवा विवाह व अंतर्जातीय विवाह करने वालों को सरकारी स्तर पर सहयोग दी जा रही है।
वहीं संस्कृत शिक्षक हीरालाल शास्त्री ने कहा कि विश्व इतिहास में महात्मा ज्योतिवा फुले का नाम समाज सुधारकों में अग्रगण्य है।वे तमाम कुरीतियों को समाप्त कर सामाजिक समरसता निर्माण करने वाले महापुरुष थे।आज उनकी जीवनी को आत्मसात करने की जरूरत है।
इस अवसर पर दलित युवा संग्राम परिषद् के हरिवंश कुमार, मनीष कुमार, ऋतुराज कुमार, सावन आनंद ,दशम वर्ग की छात्राएं में पल्लवी कुमारी,रूपाली, कल्पना, अनुवर्ता,स्वीटी , राजमणि, रूपम,सुषमा,अंशु कुमारी,छात्रों में मणिकांत कुमार, कुमोद,सौरव,सूर्यवंश, निशांत,प्रिंस, व्रजेश एवं अभिषेक कुमार आदि ग्रामीण उपस्थित थे।

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