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फाइलेरिया से जुड़ी मिथकों को दूर कर रहा है रोगी सहायता समूह

पूर्णिया, बिहार दूत न्यूज।

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दुनिया में कई ऐसी बीमारियां हैं, जिनका इलाज संभव है । ऐसी ही एक बीमारी का नाम है लिम्फीडिमा (फाइलेरिया), जिसे आम भाषा में हाथीपांव भी बोलते हैं। इसे दुनिया की सबसे अनोखी बीमारी बताया जाता है। फाइलेरिया यानी हाथीपांव कभी ठीक न होने वाला एक असाध्य रोग है। सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि फाइलेरिया संक्रमण का पता लोगों को वर्षों बाद चलता है। जब रोग का लक्षण संक्रमित व्यक्ति के शरीर पर स्पष्ट तौर पर दिखने लगता है। संक्रमण के प्रभाव से रोगी के हाथ, पांव, अंडकोष सहित शरीर के अन्य अंग में अत्यधिक सूजन उत्पन्न होने लगती है। समय-समय पर रोगियों को प्रभावित अंगों में दर्द, लालपन व तेज बुखार की शिकायत होती है। शुरुआत में सूजन अस्थायी होती लेकिन बाद में ये स्थायी व लाइलाज हो जाती है। ऐसे हालात में रोग प्रभावित अंग की समुचित देखभाल जरूरी होती है। फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जमीनी स्तर पर जरूरी प्रयास किया जा रहा है। भारत का लक्ष्य वैश्विक लक्ष्य से तीन वर्ष पहले यानी वर्ष 2027 तक फाइलेरिया को समाप्त करना है। हाथीपांव के साथ जीवन बोझिल महसूस होता है। यह आवश्यक है कि मरीज फ़ाइलेरिया का प्रबंधन कैसे हो इसके बारे में जाने और इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाये। रोग से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए रोग प्रबंधन व दिव्यांगता रोकथाम के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसे लेकर फाइलेरिया मरीजों को रोग प्रभावित अंगों की समुचित सफाई के तकनीक से अवगत कराते हुए उन्हें एमएमडीपी किट मुहैया करायी जा रही है। फाइलेरिया मरीजों को समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये जिले के हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर , प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में विशेष फाइलेरिया क्लीनिक संचालित हैं। फाइलेरिया रोग पर प्रभावी नियंत्रण संबंधी उपायों की मजबूती में फाइलेरिया रोगी सहायता समूह अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। जिले में फाइलेरिया रोगी सहायता समूह नेटवर्क के सदस्य फाइलेरिया के नये मरीजों को चिह्नित करने व उन तक जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचाने में मददगार साबित हो रहे हैं।

समुदाय स्तर पर लोगों को किया जा रहा जागरूक-
फाइलेरिया रोगी सहायता समूह के सदस्य, समुदाय में लोगों को फाइलेरिया रोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं के प्रति जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर पी मंडल ने बताया कि रोग के प्रति जागरूकता किसी भी रोग से बचाव का महत्वपूर्ण जरिया है। उन्होंने बताया कि जिले के के-नगर , पूर्णिया पूर्व एवं कसबा में बने रोगी सहायता समूह फाइलेरिया के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए बीमारी से जुड़ी मिथक को दूर कर रहा है। फाइलेरिया मरीजों को सभी जरूरी चिकित्सकीय सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है। फाइलेरिया क्लीनिक का संचालन इस दिशा में मददगार साबित हो रहा है। फाइलेरिया के नये मरीजों को रोग प्रबंधन तकनीक से अवगत कराते हुए एमएमडीपी किट मुहैया करायी जा रही है। साथ ही हाइड्रोसील मरीजों को सर्जरी की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। फाइलेरिया मरीजों के लिये सभी जरूरी सुविधाएं पूरी तरह नि:शुल्क होने की जानकारी उन्होंने दी।

जिले में फाइलेरिया के कुल 6247 मरीज-

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर पी मंडल ने बताया कि जिले में फाइलेरिया के कुल 6247 मरीज हैं।जिसमे 1269 हाइड्रोशिल एवं 4978 लिम्फोडिमा के मरीज है ।फाइलेरिया मरीजों को उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में रोगी सहायता समूह के सदस्य सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। साथ ही समूह की मासिक बैठकों में रोग प्रबंधन व इसे नियंत्रण से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत चर्चा करते समुदाय स्तर पर इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है। जिले में फिलहाल 27 रोगी सहायता समूह सक्रिय हैं। जिले के क़सबा प्रखंड में 06 , पूर्णिया पूर्व में 09 एवं कृत्यनन्द नगर प्रखंड में 12 सक्रिय इन समूह के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर जन जागरूकता फैलाते हुए फाइलेरिया को जड़ से खत्म करने की मुहिम को मजबूत बनाया जा रहा है। फाइलेरिया को नियंत्रित करने के लिये प्रभावित अंग की समुचित देखरेख व व्यायाम जरूरी है। इसके प्रति आम रोगियों को जागरूक करने के उद्देश्य से ग्रामीण स्तर पर फाइलेरिया पेशेंट सपोर्ट समूह गठित की गयी। मासिक रूप से इसकी नियमित बैठकों में मरीज को जरूरी व्यायाम व साफ-सफाई के तकनीक के बारे में बताया जाता है। रोग के विभिन्न चरणों के आधार पर रोगियों को जरूरी सुझाव दिया जाता है। ताकि रोग को नियंत्रित किया जा सके।

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