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फाइलेरिया मरीजों के विशेष देखभाल के लिए जिले में चलाया जा रहा है पेशेंट सपोर्ट ग्रुप

पूर्णिया, बिहार दूत न्यूज।

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ग्रामीण क्षेत्रों में फाइलेरिया से ग्रसित मरीजों को प्रभावित अंग की बेहतर देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूर्णिया पूर्व प्रखंड के महेंद्रपुर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में 30 फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को मोरबिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रीवेंशन (एमएमडीपी) किट प्रदान की गयी। सभी मरीजों को किट प्रदान करते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा फाइलेरिया ग्रसित अंगों की देखभाल करने और नियमित रूप से आवश्यक दवाइयों के उपयोग करने की जानकारी दी गई। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी फाइलेरिया के मरीजों को अपने घर एवं आसपास के लोगों को फाइलेरिया से सुरक्षित रहने के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया गया। इस दौरान जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. आर. पी. मंडल के साथ भीडीसीओ रविनंदन सिंह, जिला भीबीडी कंसल्टेंट सोनिया मंडल, आरपीएम कैसर इकबाल, डीसीक्यूए डॉ. अनिल कुमार, पूर्णिया पूर्व एमओआईसी डॉ शरद कुमार, बीएचएम विभव कुमार, सीफार डीसी ज्योति प्रिया, बीसी विभास कुमार, हेल्थ एंड वेलनेस चिकित्सा अधिकारी डॉ राहुल कुमार, आर. एन. चौधरी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

मरीजों को सावधानी रखते हुए ग्रसित अंगों के देखभाल की दी गई जानकारी :

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर पी मंडल ने बताया कि फाइलेरिया ग्रसित मरीजों का सम्पूर्ण इलाज नहीं हो सकता लेकिन इसे नियंत्रित रखा जा सकता है। इसके लिए मरीजों को ग्रसित अंगों की सही तरीके से देखभाल करना जरूरी है। ज्यादातर लोगों के पांव फाइलेरिया से ग्रसित होते हैं जिसे आमतौर पर हाथीपांव भी कहा जाता । ऐसे में लोगों को इसका विशेष ध्यान रखना जरूरी है। पांव को नियमित रूप से डेटॉल साबुन से साफ करने के साथ उसमें एंटीसेप्टिक क्रीम लगानी चाहिए। इससे ग्रसित अंगों का आवश्यक नियंत्रण किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पांव के अतिरिक्त लोगों के हाथ, हाइड्रोसील व महिलाओं के स्तन भी फाइलेरिया से ग्रसित हो सकते हैं। समय से इसकी पहचान करते हुए आवश्यक चिकित्सकीय सहायता लेने से इसे नियंत्रित रखा जा सकता है।

फाइलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी :

भीडीसीओ रविनंदन सिंह ने कहा कि फाइलेरिया बीमारी विशेष रूप से परजीवी क्यूलैक्स फैंटीगंस मादा मच्छर के काटने से होने वाला रोग है जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में मानसुनिया मच्छर भी कहा जाता । जब यह मच्छर किसी फाइलेरिया से ग्रस्त व्यक्ति को काटता तो उनके शरीर से फाइलेरिया विषाणु उठाकर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटने पर उनके शरीर में डाल देता है। इससे फाइलेरिया के विषाणु रक्त के जरिए उसके शरीर में प्रवेश कर उसे भी फाइलेरिया से ग्रसित कर देता। फाइलेरिया को खत्म करने के लिए कोई विशेष इलाज नहीं है लेकिन जागरूक रहकर बचाव करने से इसे नियंत्रित रखा जा सकता। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया न सिर्फ व्यक्ति को विकलांग बनाता बल्कि इससे मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। अगर समय रहते फाइलेरिया की पहचान कर ली जाए तो जल्द ही इसका इलाज शुरू कर इसे नियंत्रित रखा जा सकता है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीजों को देखभाल की दी जा रही नियमित जानकारी :

पूर्णिया पूर्व प्रखंड के एमओआईसी डॉ शरद कुमार ने कहा कि फाइलेरिया के मरीजों की देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित रूप से ध्यान रखा जाता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को एमएमडीपी किट प्रदान की जाती है। जिसमें मरीजों को एक टब, एक मग, कॉटन बंडल, तौलिया, डेटॉल साबुन, एंटीसेप्टिक क्रीम दिया जाता है । जिससे कि सम्बंधित मरीज फाइलेरिया ग्रसित अंगों का विशेष ध्यान रख सकते हैं। इसके साथ ही मरीजों को फाइलेरिया से सुरक्षित रहने के प्रति भी जानकारी दी जाती है।

फाइलेरिया मरीजों के विशेष देखभाल के लिए जिले में चलाया जा रहा है पेशेंट सपोर्ट ग्रुप :

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. आर. पी. मंडल ने बताया कि फाइलेरिया ग्रसित मरीजों का नियमित ध्यान रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के तीन प्रखंडों (पूर्णिया पूर्व, कसबा और के.नगर) में पेशेंट सपोर्ट ग्रुप चलाया जा रहा है। इसके द्वारा स्थानीय क्षेत्र के सभी फाइलेरिया ग्रसित मरीजों की हर माह बैठक की जाती है। जिसके द्वारा उनके फाइलेरिया ग्रसित अंगों की जानकारी लेते हुए उन्हें आवश्यकतानुसार चिकित्सकीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके साथ ही पेशेंट सपोर्ट ग्रुप द्वारा सभी स्थानीय लोगों को भी फाइलेरिया से सुरक्षित रहने के लिए नियमित साफ सफाई, मच्छरदानी का उपयोग एवं हर साल सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम में भाग लेने के प्रति जागरूक किया जाता है।

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