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नेशनल हेल्थ ऑथोरिटी के जॉइंट डायरेक्टर ने सामुदायिक स्वास्थ्य अस्पताल का किया निरक्षण

पूर्णिया, बिहार दूत न्यूज।

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आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के अंतर्गत प्रमंडलीय स्तर के सूचीबद्ध अस्पतालों को मरीजों के लिए उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर क्वालिटी प्रमाणपत्र लेने के लिए पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज के आयुष्मान भारत सूचीबद्ध अस्पतालों के प्रतिनिधियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।

इस दौरान सभी अस्पताल प्रतिनिधियों को मरीजों के सुविधा के लिए अस्पताल में व्यवस्था उपलब्ध कराने की जानकारी देते हुए क्वालिटी प्रमाणपत्र से अस्पतालों को होने वाले लाभ की जानकारी दी गई। आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के तहत एकदिवसीय कार्यशाला की अध्यक्षता नेशनल हेल्थ ऑथोरिटी (एनएचए) के जॉइंट डायरेक्टर विक्रम पगारिया द्वारा की गई। इस दौरान बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति, पटना के प्रशासी पदाधिकारी अभिताभ सिंह, ऑपरेशन निदेशक डॉ आलोक रंजन, पूर्णिया सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी, एनएचए के राज्य समन्यवक पूजा चवन,एनएचए के डॉ कविता, क्यूसीआई डॉ रोहित, पारस मनी, कंसल्टेंट दीपिका रावत, प्रीति बैरा, आईईसी मैनेजर रितेश कुमार मिश्र, आयुष्मान भारत जिला क्रियान्वयन इकाई के जिला कार्यक्रम समन्यवक नीलाम्बर कुमार, डीआईटीएम अजित कुमार सहित प्रमंडल स्तरीय कुल 75 आयुष्मान भारत सूचीबद्ध अस्पतालों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सूचीबद्ध अस्पताल को क्वालिटी प्रमाणपत्र से होने वाले लाभ की दी गई जानकारी :

एकदिवसीय प्रशिक्षण में आयुष्मान भारत के लिए सूचीबद्ध अस्पतालों को मरीजों के लिए उपलब्ध सुविधा की जानकारी के आधार पर क्वालिटी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने की जानकारी दी गई। एनएचए के जॉइंट डायरेक्टर विक्रम पगारिया ने बताया कि प्रमाणपत्र के लिए अस्पतालों में साफ -सफाई, सभी प्रकार की जांच, आवश्यक दवाइयों की सुविधा, चिकित्सकों द्वारा मरीजों की जांच के दौरान ग्लब्स, किट्स आदि की व्यवस्था, गंभीर अवस्था के मरीजों के लिए अस्पताल में भर्ती करने की व्यवस्था, एम्बुलेंस सुविधा, मरीज, उनके सहयोगी और अस्पताल कर्मी के सुरक्षा की व्यवस्था, रैंप-व्हीलचेयर की व्यवस्था, बिजली सुविधा, अस्पतालों में कचरा प्रबंधन के लिए उपलब्ध डस्टबिन सुविधा, अग्निशमन व्यवस्था आदि उपलब्ध रहना चाहिए। डॉ कविता ने बताया कि आयुष्मान भारत क्वालिटी प्रमाणपत्र के लिए अस्पताल में उपस्थित कर्मियों द्वारा आपातकाल स्थिति में मरीजों की सहायता के लिए अस्पताल कर्मी द्वारा सीपीआर देने के लिए प्रशिक्षित करने का निर्देश दिया गया। अस्पतालों में उपलब्ध इन सभी मापदंडों के आधार पर अस्पतालों को प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन करना है। सभी मापदंडों की जांच के बाद अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। इसके आधार पर अस्पताल को आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के तहत मरीजों के इलाज के लिए तय राशि के अतिरिक्त क्वालिटी के आधार पर 05 से 15 प्रतिशत अतिरिक्त राशि प्रदान की जाएगी।

मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल क्वालिटी में सुधार आवश्यक :

सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने सभी अस्पताल प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि अस्पताल में मरीजों की जांच के साथ अस्पताल क्वालिटी भी उनके जल्द स्वस्थ होने में सहायक होता है। अब अस्पतालों में उपलब्ध क्वालिटी के आधार पर उन्हें मरीजों के इलाज में खर्च राशि के अतिरिक्त राशि का भुगतान भारत सरकार द्वारा किया जाएगा। इसके लिए प्रतिनिधियों को अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है। अस्पताल में उपलब्ध मरीजों को आसानी से पर्ची काटने के साथ समय पर जांच होने, भर्ती होने के लिए उपलब्ध बेड होने, बीमारी के आधार पर अस्पताल में दवाई के उपलब्ध होना जरूरी है। इन सभी व्यवस्था के होने की स्थिति में अस्पताल द्वारा क्वालिटी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया जा सकता है। इसके आधार पर अस्पतालों को मरीजों की जांच में हो रहे खर्च के अतिरिक्त राशि प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के द्वारा विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीजों को सूचीबद्ध अस्पतालों द्वारा आसानी से बेहतर चिकित्सकीय सहायता प्रदान किया जाता है। इसके लिए मरीजों द्वारा आयुष्मान कार्ड के साथ संबंधित परिवार के किसी भी मरीजों का सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज कराने पर पांच लाख रुपये प्रतिवर्ष दिया जाता है।

नेशनल हेल्थ ऑथोरिटी के जॉइंट डायरेक्टर ने सामुदायिक स्वास्थ्य अस्पताल का किया निरक्षण :

नेशनल हेल्थ ऑथोरिटी के जॉइंट डायरेक्टर विक्रम पगारिया द्वारा प्रशिक्षण के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कसबा में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन अंतर्गत मरीजों के लिए उपलब्ध सुविधा का निरक्षण किया गया। इसके अंतर्गत स्वास्थ्य केंद्र के पर्ची काउंटर पर आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ एकाउंट) कार्ड के निर्माण का जायजा लिया। आभा कार्ड में प्रत्येक मरीजों के चिकित्सकीय रिकॉर्ड को डिजिटली सुरक्षित रखा जाता है। आभा कार्ड में रिकॉर्ड जानकारी के आधार पर भविष्य में भी मरीजों की चिकित्सकीय जानकारी अस्पताल में अधिकृत कर्मी द्वारा देखा जा सकता है। सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि किसी भी व्यक्ति द्वारा आधार कार्ड के आधार पर आभा कार्ड बनाया जा सकता है। इसके होने से मरीज के सभी स्वास्थ्य जांच की रिकॉर्ड आसानी से राखी जा सकती है।

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