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कालाजार उन्मूलन के लिए जिले में शुरू हुआ छिड़काव अभियान

पूर्णिया, बिहार दूत न्यूज।

लोगों को बालूमक्खी के काटने से होने वाले बीमारी कालाजार से सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुक्रवार से जिले में कालाजार छिड़काव अभियान की शुरुआत की गई। जिलाधिकारी कुंदन कुमार के निर्देश पर जिले के बायसी और बैसा प्रखंड के अतिरिक्त अन्य 12 प्रखंडों के ऐसे संभावित कालाजार ग्रसित गांवों में छिड़काव अभियान की शुरुआत की गई जहां पिछले तीन वर्षों में कालाजार के संभावित मरीज पाए गए हैं। कालाजार उन्मूलन के लिए छिड़काव अभियान की शुरुआत सिविल सर्जन डॉ ओ पी साहा द्वारा पूर्णिया पूर्व प्रखंड के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रानीपतरा में फीता काटते हुए छिड़काव कर्मियों को छिड़काव मशीन देकर किया गया। इस दौरान वहां उपस्थित सभी छिड़काव कर्मियों को कालाजार के सभी संभावित गांव में सिंथेटिक पैराथायराइड (एसपी) का बेहतर छिड़काव करते हुए संबंधित क्षेत्र को कालाजार से सुरक्षित रखने का आवश्यक निर्देश दिया गया। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ ओ पी साहा के साथ जिला भेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर पी मंडल, भीबीडीएस रवि नंदन सिंह, डीभीडीएस सोनिया मंडल, पूर्णिया पूर्व प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ शरद कुमार, बीएचएम विभव कुमार के साथ पिरामल फाउंडेशन जिला प्रोग्राम लीड चंदन कुमार, विभाग कर्मी रामकृष्ण परमहंस सहित अन्य स्वास्थ्य अधिकारी और छिड़काव कर्मी उपस्थित रहे।

24 मई से 24 जुलाई तक जिले सभी प्रखंडों के 119 चिह्नित गांवों में किया जाएगा छिड़काव :

जिला भेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर पी मंडल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर छः महीने में जिले लोगों को कालाजार से सुरक्षित रखने के लिए छिड़काव अभियान चलाया जाता है। इस दौरान पिछले तीन वर्षों में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पाए गए ज्यादा कालाजार मरीजों को देखते हुए वहां छिड़काव अभियान चलाया जाएगा। पूर्णिया जिला में 24 मई से 24 जुलाई तक चलाए जाने वाले कालाजार छिड़काव अभियान के लिए जिले के 12 प्रखंडों के 119 गांवों/कस्बों को चिह्नित किया गया है। सम्भावित मरीजों की संख्या देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा 119 गांवों के 03 लाख 16 हजार 794 घरों में सिंथेटिक पैराथायराइड का छिड़काव किया जाएगा। इसके लिए जिले में 62 छिड़काव कर्मियों की टीम बनाई गई है। छिड़काव टीम द्वारा सभी संभावित गांवों/कस्बों के सभी घरों में कालाजार बीमारी के लिए जिम्मेदार बालूमक्खी को समाप्त करने के लिए एसपी स्प्रे का छिड़काव किया जाएगा। इससे संबंधित क्षेत्र के अन्य लोगों को कालाजार बीमारी से सुरक्षित किया जा सकता है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी प्रखंडों में निरक्षण टीम बनाई गई है जिसके द्वारा प्रतिदिन छिड़काव संबंधित सभी जानकारी सुनिश्चित किया जाएगा। संभावित क्षेत्रों में लोगों को कालाजार से सुरक्षा के लिए जागरूक करते हुए घरों में छिड़काव करवाने में सहयोग करने के लिए सभी क्षेत्र की आशा और आंगनवाड़ी कर्मियों को भी निर्देश दिया गया है।

वर्तमान में जिले में हैं 08 कालाजार से ग्रसित मरीज, हो रहा सबका उपचार :

जिला भेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर पी मंडल ने कहा कि कालाजार बीमारी बालूमक्खी के काटने से होने वाला रोग है। नमी एवं अंधरे वाले स्थान पर कालाजार की मक्खियां ज्यादा फैलती है लेकिन इससे ग्रसित मरीजों का इलाज आसानी से संभव है। यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी प्रवेश कर जाता है। दो सप्ताह से अधिक बुखार, पेट के आकार में वृद्धि, भूख नहीं लगना, उल्टी होना, शारीरिक चमड़ा का रंग काला होना आदि कालाजार बीमारी के लक्षण हैं। ऐसा लक्षण वाले मरीजों को विसरल लीशमैनियासिस (वीएल) कालाजार की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसा लक्षण शरीर में महसूस होने पर ग्रसित मरीज को अविलंब जांच कराना जरूरी होता है। इसका इलाज कराने के बाद भी ग्रसित मरीज को सुरक्षित रहने के आवश्यकता होती है। इसके उपचार में विलंब से हाथ, पैर और पेट की त्वचा काली होने की शिकायतें मिलती हैं जिसे पोस्ट कालाजार डरमल लिश्मैनियासिस (पीकेडीएल) कालाजार से ग्रसित मरीज कहा जाता है। मुख्य रूप से पोस्ट कालाजार डरमल लिश्मैनियासिस (पीकेडीएल) एक त्वचा रोग है जो कालाजार के बाद होता है। जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में कालाजार का इलाज आसानी से हो सकता है। छिड़काव अभियान के दौरान क्षेत्रों में ऐसे मरीजों की भी खोज की जाएगी और उन लोगों को तत्काल इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले में 03 वीएल और 05 पीकेडीएल से ग्रसित मरीज पाए गए हैं जिसका स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है।

कालाजार मरीजों को इलाज के साथ श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाती है सहायता राशि :

सिविल सर्जन डॉ ओ पी साहा ने बताया कि कालाजार के मरीजों को सरकारी अस्पताल में इलाज आसानी से किया जाता है। इलाज के साथ ही कालाजार संक्रमित मरीजों को सरकार द्वारा श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में सहायता राशि भी प्रदान की जाती है। सरकार द्वारा भीएल कालाजार से पीड़ित मरीज़ को 7100 रुपये की श्रम-क्षतिपूर्ति राशि भी दी जाती है। यह राशि भारत सरकार के द्वारा 500 एवं राज्य सरकार की ओर से कालाजार राहत अभियान के अंतर्गत मुख्यमंत्री प्रोत्साहन राशि के रूप में 6600 सौ रुपये दी जाती है। वहीं पीकेडीएल कालाजार से पीड़ित मरीज को राज्य सरकार द्वारा 4000 रुपये की सहायता राशि श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान की जाती है।

छिड़काव के दौरान फाइलेरिया ग्रसित मरीजों के पहचान का मिला निर्देश :

सिविल सर्जन डॉ ओ पी साहा द्वारा कालाजार छिड़काव के दौरान छिड़काव कर्मियों को फाइलेरिया से ग्रसित मरीजों के पहचान करने का भी निर्देश दिया गया है। सिविल सर्जन डॉ साहा ने कहा कि क्यूलेक्स मादा मच्छर द्वारा ग्रसित मरीज के बाद सामान्य व्यक्ति को काटने से लोग फाइलेरिया के शिकार हो जाते हैं। कालाजार ग्रसित मरीजों का उपचार संभव है लेकिन फाइलेरिया ग्रसित मरीज का सम्पूर्ण इलाज नहीं किया जा सकता है। ऐसे मरीजों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित रूप से एमएमडीपी किट्स प्रदान किया जाता है जिसका उपयोग कर मरीज ग्रसित अंग को नियंत्रित रख सकते हैं। इसके साथ ही ज्यादा फाइलेरिया ग्रसित मरीज को स्वास्थ्य विभाग द्वारा विकलांग प्रमाणपत्र दिया जाता है। इसके उपयोग से ग्रसित मरीजों को विकलांग पेंशन का लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया ग्रसित मरीज हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) में सभी जरूरी कागजात के साथ विकलांग प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं।

सिविल सर्जन ने किया अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरक्षण :

कालाजार छिड़काव अभियान का उद्घाटन करने के साथ ही सिविल सर्जन डॉ ओ पी साहा द्वारा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रानीपतरा का निरक्षण भी किया गया। इस दौरान उन्होंने वहां मरीजों के लिए उपलब्ध प्रसव कक्ष, पुरूष कक्ष, फाइलेरिया क्लीनिक, जांच केंद्र और दवा केंद्र का निरक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि बहुत जल्द अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का राज्य स्तरीय टीम द्वारा एनक्यूएएस प्रमाणपत्र के लिए निरक्षण किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल में मरीजों के लिए बेहतर चिकित्सा सेवा देने की तैयारी की जा रही है। बहुत जल्द अस्पताल में एनक्यूएएस मानक के अनुसार सुविधाएं पूरी की जाएगी जिससे कि आने वाले टीम उसका बेहतर मूल्यांकन करते हुए अस्पताल को एनक्यूएएस प्रमाणपत्र जारी कर सके।

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