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हैदराबाद से अकेले चुनाव लड़ने वाले ओवैसी जहां सेक्युलर ताकतें मजबूत है, वहीं से अधिक सीटों पर चुनाव क्यों लड़ते हैं :अली अशरफ फातमी

पटना, बिहार दूत न्यूज।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सह इंडिया गठबंधन समर्थित राष्ट्रीय जनता दल के मधुबनी लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार मो अली अशरफ फातमी ने कहा कि भाजपा और संघ परिवार को जब तीन चरणों के चुनाव के बाद इस बात का एहसास हो गया की बिहार में में एनडीए की स्थिति ठीक नहीं है, तो भाजपा को फायदा पहुंचाने की नीयत से बिहार के चुनाव में वहां – वहां पर ओवैसी ने अपना उम्मीदवार उतारा , जहां पर मुकाबला काफी नजदीकी है। और सेक्युलर ताकतों को कमजोर करने की नीयत से ऐसा किया गया।
‌‌आगे इन्होंने आरोप लगाया कि आखिर क्या कारण है कि जहां ओवैसी सिर्फ हैदराबाद से ही चुनाव लड़ते हैं और अपने गृह प्रदेश तेलंगाना और पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में उम्मीदवार नहीं देते हैं। लेकिन वहीं बिहार ,यूपी ,पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में एआईएमआई थोक भाव में इन राज्यों में उम्मीदवार देती है ,जहां-जहां सेक्युलर ताकतें मजबूत है , वहां पर भाजपा और संघ परिवार के कहने पर ही उम्मीदवार उतारा जाता है।अब इनके राजनीतिक इस्तेमाल होने वाली चाल को सभी लोग समझ चुके हैं, और वह पूरी तरह से एक्सपोज हो गए हैं। ये भाजपा के खिलाफ बोलते तो हैं, लेकिन इनके द्वारा उम्मीदवार वैसे ही टैक्टर को मदद पहुंचना है जो देश की एकता अखंडता को लगातार चैलेंज कर रहे हैं।
इन्होंने आगे कहा कि एआइएमआइएम के पास ना तो पार्टी का कार्यकर्ता है और ना ही अल्पसंख्यक समाज के लिए
सरजमीन पर इनके द्वारा काम किया जाता है। आखिर क्या कारण है कि जब भी चुनाव आता है सेक्युलर जमात के वोट को कमजोर करने के लिए चुनाव मैदान में ये अपना उम्मीदवार खड़ा कर देते हैं ,जबकि मैंने उनके पिताजी और उनके साथ जो भाजपा ने दुर्व्यवहार किया, उसमें पार्लियामेंट में मैं उनके साथ खड़ा रहा । उन्होंने स्वयं भी स्वीकारा है कि फातमी मेरे साथ खड़े नहीं होते तो मेरे साथ कुछ भी हो सकता था,लेकिन उन्होंने मेरे खिलाफ भी उम्मीदवार दे दिया यही इनका अकलियतों को सियासी तौर पर मजबूत करने का सोंच है।
फातमी ने आगे आरोप लगाया कि मधुबनी लोकसभा क्षेत्र में अल्पसंख्यक वोटरों को घर से नहीं निकलने देने
का पूर्व से ही प्लान था और वोटिंग प्रतिशत कम से कम हो इसके लिए साजिश रची गई। इसी के अंतर्गत जाले विधानसभा क्षेत्र के देवरा बंदोली गांव में जो मुसलमान की बड़ी आबादी है ,वहां पर बुर्का और दाढ़ी वालों के साथ बदसुलूकी की गई और बाद में उनके साथ बिहार सरकार के पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा के कहने पर मुस्लिम बच्चियों को थाने में ले जाकर बंद कर दिया गया। जबकि चुनाव खत्म होने के बाद आचार संहिता के मामले पर पूरे जिला में पीआर बांड के अंतर्गत सभी को छोड़ दिया गया लेकिन इस गांव की बच्चियों को छोड़ा नहीं गया और इसे दूसरी तरह से प्रचारित किया जा रहा है । जिस तरह से पूरे देश भर में बुर्का को लेकर एजेंडा बनाकर भाजपा राजनीति कर रही है। इस तरह के कृत्यों के सहारे पूरे इलाके में आतंक का माहौल खड़ा कर दिया गया है ।और बच्चियों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है यह स्पष्ट करता है कि भाजपा का महिलाओं के प्रति क्या सोच है जबकि यह पहली बार वोट डालने गई थी। जिस तरह की बातें प्रचारित की जा रही है उसमें कहीं कोई सच्चाई नहीं है सच तो यह है कि पुलिस पहले ही पूर्व मंत्री के ईशारे पर महिलाओं के साथ वोट डालने से पहले जिस तरह का दुरर्व्यवहार कर रही थी, वह स्पष्ट रूप से दिखा । जबकि सबको पता है कि चुनाव के कार्यों को पीठासीन पदाधिकारी देखने का काम करते हैं और वोटर की पहचान भी उनके ही माध्यम से होती है ,
लेकिन संघ परिवार और भाजपा के कहने पर स्थानीय डीएसपी के द्वारा कहीं ना कहीं मामले को भड़काने का प्रयास किया गया है। इस तरह के मामले में जो आतंक का माहौल खड़ा कर दिया गया है उसपर रोक लगनी चाहिए। और महिलाओं के साथ जो दुर्व्यवहार और उनके गिरफ्तारी के नाम पर इर्द-गिर्द के गांव में छापेमारी की जा रही है यह कहीं से उचित नहीं है ,और ऐसे कृत्य को कोई भी अमन पसंद आवाम पसंद नहीं कर सकता है।
संवाददाता सम्मेलन में इस अवसर पर पूर्व विधायक श्री रामाशीष यादव, प्रदेश राजद प्रवक्ता एजाज अहमद, चितरंजन गगन, अरुण कुमार यादव, राजद नेता फूल हसन अंसारी, मनोज यादव जाहिदुर रहमान उर्फ लड्डन सहित अन्य गणमान्य नेतागण उपस्थित थे।

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