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तेजस्वी की लोकप्रियता के डर से ही मंत्री बेरोजगार हटाओ रैली का कर रहे हैं विरोध :RJD

बिहार दूत न्यूज, पटना

बिहार प्रदेश राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि जुमलेबाज पार्टी भाजपा और नीतीश सरकार के मंत्री के मुंह से रोजगार की बातें हास्यास्पद और मजाक जैसी लगती है, क्योंकि 2014 से केंद्र में जबसे भाजपा की सरकार बनी है , देश के नौजवानो को रोजगार देने की जगह रोजगार छीनने का ही काम हो रहा है,और बेरोजगारों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार हो रहा है । हद तो यह है कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी जुमलेबाज पार्टी ने 19 लाख लोगों के रोजगार की बातें की लेकिन अबतक 19 लोगों को भी रोजगार नहीं दिया जा सका। उल्टे जो बेरोजगार प्रतियोगिता परीक्षा पास कर चुके हैं, उन्हें उधेड़बुन की स्थिति में रखकर बहाली की प्रक्रिया को ही रोके रखा गया है जहां एस एस सी, बी एस एस सी ,एस टी ई टी, टी ई टी ,दरोगा तथा सिपाही की भर्ती में प्रतियोगिता पास कर चुके बेरोजगार नौजवानों को नियुक्ति पत्र देने की जगह उन्हें तारीख पर तारीख देकर नियुक्ति प्रक्रिया को ही टाला जा रहा है। विडंबना यह है कि जो लोग पहले से नियोजन के माध्यम से बहाल किए गए थे उन्हें भी 5 साल बाद बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है , जिसमें एक लाख चौवालीस (144000) पंचायत सचिव के नियोजन की प्रक्रिया को ही पांच साल बाद रद्द कर दिया गया है और उन्हें इन पांच सालों में काम के बदले भुगतान भी ना के बराबर किया गया । और पंचायत सचिव पटना की सड़कों पर कड़ाके की ठंड में करीबहुत हफ्ते भर से बैठे हुए हैं, और सरकार इनकी बातों को सुन नहीं रही है ।
एजाज ने आगे कहा कि बिहार में राष्ट्रीय जनता दल तेजस्वी प्रसाद यादव के नेतृत्व में सबसे बड़े दल के रूप में आमजनों के द्वारा स्वीकार किया गया है ।और जनता के द्वारा इनके नेतृत्व पर विश्वास करके मजबूत जनाधार देने का काम किया है । लेकिन चोर दरवाजे और मतों का हरण करके डबल इंजन की सरकार बनाने वाले आज बेरोजगारी के सवाल पर रैली की घोषणा से ही तिलमिला रहे हैं क्योंकि इन लोगों को इस बात का डर है कि चोर दरवाजे से जो सरकार बनाकर इन लोगों ने रोजगार हासिल कर लिया है उन्हें तेजस्वी प्रसाद यादव के नेतृत्व में होनेवाले बेरोजगारी हटाओ रैली के बाद बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है,और वह बेरोजगार हो सकते हैं ,क्योंकि एनडीए के घटक दलों के अंदर की बेचैनी से ही यह स्पष्ट हो रहा है कि अब एनडीए के पार्टनर भी समझ रहे हैं कि नीतीश के नेतृत्व में आगे इन्हें जनता का जनादेश नहीं मिल सकता है।और जिस तरह से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के प्रति महंगाई, भ्रष्टाचार, किसानों के मुद्दे और बेरोजगारी के सवाल पर लोगों में गोलबंदी देखी जा रही है उससे भाजपा के अंदर भी बेचैनी स्पष्ट रूप से झलक रहा है ।
इन्होंने ने आगे कहा कि छोटे बजट में भी बिहार में सड़कों, पुलों का निर्माण तेजस्वी प्रसाद यादव के पथ निर्माण मंत्री रहते करवाया वह काम दिख रहा था, लेकिन नीतिन नवीन ने एक बड़ा बजट रहते हुए भी पीडब्ल्यूडी में भ्रष्टाचार का गंगोत्री खोलकर बिहार को उद्घाटन से पहले पुल के गिरते हुए, डायवर्सन टूटते हुए और सड़क निर्माण के उद्घाटन के समय नारियल की जगह सड़क के टूटते हुए देखा है । इस बात का प्रतीक है कि राज्य में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जो सरकार चल रही है उसमें ट्रांसफर पोस्टिंग को व्यवसाय का रूप दे दिया गया है ,और भ्रष्टाचार को शिष्टाचार के तौर पर स्वीकार कर लिया गया है। इस कारण जो भी मंत्री बने हुए हैं वह बेरोजगार होने से पहले अपने परिवार का भी रोजगार के लिए धन उपार्जन का जरिया बना लिए हैं ,जो भाजपा और जदयू के विधायकों के द्वारा अपने ही मंत्रियों पर दिए गए बयान से ही स्पष्ट होता है।
एजाज ने कहा कि जुमलेबाज पार्टी से तेजस्वी को सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है, , क्योंकि बिहार की जनता ने इनको सशक्त विपक्ष के रूप में स्वीकार्यता प्रदान कर यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाला समय तेजस्वी ही बिहार के नेतृत्व करने में सक्षम है और यह बिहार ही नहीं देश के युवाओं के आइकॉन है और युवा इनके द्वारा रोजगार के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए इनके नेतृत्व पर विश्वास कर रहा है।

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