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प्रदेश को नई दिशा दे रहे मुख्यमंत्री, समाज बदलेगा तो बिहार बदलेगा : प्रो. रणबीर नंदन

पटना: जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता और पूर्व विधान पार्षद प्रो. रणबीर नंदन ने कहा कि सरकार सामाजिक विकास के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन पर भी जोर दे रही है। आप देख लीजिए, सरकार ने ग्रामीण विकास योजनाओं पर सालाना करीब 35 फीसदी के विकास के साथ बजटीय प्रावधान किया है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में ग्रामीण विकास की योजनाओं पर 24,156 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, समाज कल्याण एवं पोषण की योजनाओं पर 20 फीसदी की वार्षिक विकास के साथ राशि का आवंटन हुआ है। वर्ष 2019-20 में 8810 करोड़ रुपये समाज कल्याण और पोषण की योजनाओं पर खर्च किए गए। वहीं, वर्ष 2021-22 में यह बढ़ाकर 12,610 करोड़ किया गया है। वृद्धावस्था पेंशन पर 953 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं।
प्रो. नंदन ने कहा कि इनके अलावा आवास योजनाओं पर इस वित्तीय वर्ष में 9075 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से इंदिरा आवास योजना के लिए 8200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सीधा अर्थ यह है कि माननीय मुख्यमंत्री केवल सामाजिक परिवर्तक की बात नहीं कर रहे। समाज में परिवर्तन के लिए अपेक्षित विकास को भी बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज सुधार अभियान के जरिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार को एक नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव लाया जाना जरूरी है। शराबबंदी कानून प्रदेश की तस्वीर को बदलने वाला फैसला है। हर एक व्यक्ति को सरकार के इस फैसले की असलियत और इसके प्रभाव के बारे में बताया जाना जरूरी है। माननीय मुख्यमंत्री इस अभियान के जरिए आम लोगों को जागरूक करने में जुटे हैं। निश्चित तौर पर समाज में बदलाव आएगा तो प्रदेश की सूरत भी बदलेगी।
प्रो. नंदन ने कहा कि वर्ष 2015 में जीविका दीदी के कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री से शराबबंदी लागू करने की मांग की गई थी और सत्ता में आने पर इसे लागू करने का उन्होंने वादा किया था। मुख्यमंत्री ने अपने वादे को पूरा किया। साफ है कि मुख्यमंत्री के स्तर पर किया जाने वाला वादा चुनावी नहीं होता है। नीतीश कुमार जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं। वर्ष 2005 में सत्ता संभालने के बाद प्रदेश को अपराधमुक्त करने का वादा किया था, अपने कार्यकाल के पहले ही साल में उन्होंने बिहार से संगठित अपराध को खत्म करने में सफलता पाई। गैंगवार पर लगाम लगाई। इससे महिलाएं सुरक्षित माहौल में शाम को भी घर से बाहर निकल पाईं। लड़कियों को गांव की दहलीज निकाल कर हाईस्कूल तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इसके लिए साइकिल योजना शुरू की। आज परिणाम देखिए, मैट्रिक में छात्र और छात्राओं का अनुपात समान हो गया है। लड़कियां पढ़ रही हैं और नए भविष्य को गढ़ रही हैं। प्रदेश में उच्च शिक्षा के नए संस्थान खुल रहे हैं।
प्रो. नंदन ने कहा कि कोई अब महिलाओं को सत्ता में भागीदारी बात कर रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री ने केवल बात नहीं की। स्थानीय निकाय चुनाव में महिलाओं के लिए 50 फीसदी हिस्सेदारी तय कर दी। और तो और एकल पदों पर भी महिलाओं को हिस्सा दिया गया है। आज प्रदेश में मुखिया, प्रमुख, जिला परिषद अध्यक्ष से लेकर नगर निगम के मेयर तक के पद पर महिलाओं का कब्जा हो रहा है। वे निकायों में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। प्रदेश को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का कार्य कर रही हैं। महिलाओं के विकास के लिए सरकारी नौकरियों में भी मुख्यमंत्री ने 35 फीसदी आरक्षण का निर्णय लिया है। यह महिलाओं को सही मायनों में सशक्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि केवल बोलने से विकास नहीं होता है। सामाजिक क्षेत्र के विकास के लिए लगातार काम हो रहा है। मुख्यमंत्री इस ठंड के मौसम में गांव-गांव पहुंच रहे हैं। यह उनकी समाज के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वे प्रदेशवासियों को शराब जैसी चीज के प्रति सचेत करने की कोशिश कर रहे हैं। लोग भी उनकी बातों को समझ रहे हैं। यह विपक्षी नेताओं को हजम नहीं हो रहा।

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