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बिहार के कई नवनिर्वाचित मुखिया-सरपंच समेत हजारों वार्ड सदस्य-पंच हो जायेंगे बेरोजगार, सरकार का बड़ा फैसला

संजय भारती , समस्तीपुर बिहार निकाय चुनाव को लेकर बिहार सरकार का बड़ा फैसला सामने आ रही है । बिहार में नये नगर निकाय चुनाव को लेकर बिहार के तकरीबन तीन हजार पंच एवं वार्ड सदस्य हो जायेंगे बेरोजगार । वहीं कई मुखिया-सरपंच की चली जायेगी कुर्सी । बिहार सरकार नये नगर निकाय का करेगी गठन करने जा रही है जिसमें बिहार की कई पंचायत क्षेत्र नगर निकायों में शामिल होंगे । बिहार सरकार बिहार के जिलों से आये प्रस्ताव पर शीघ्र ही विचार करेगी उसके बाद ही नगर निकाय चुनाव कराने की तैयारी शुरू की जायेगी । बिहार के जिला से आये प्रस्ताव को लेकर सरकार की योजना कुछ और नगर निकाय बनाने की है । हलांकि अभी तक इस पर अंतिम रूप से निर्णय नहीं किया गया है । जिला से आये प्रस्ताव को लेकर सरकार कुछ नगर पंचायत एवं नगर परिषद को अपग्रेड करने की तैयारी में है । वर्तमान में नगर निकायों की संख्या 263 हो चुकी है । इसमें पिछले डेढ़ साल में सरकार ने 120 नये नगर निकायों के गठन को मंजूरी दी है । वहीं बिहार के कुछ जिलों का प्रस्ताव अभी लंबित है जिस पर शीघ्र ही सरकार निर्णय लेगी । हाल ही में मुंगेर जिले के तारापुर विधानसभा क्षेत्र की जनता को बिहार सरकार ने रिटर्न गिफ्ट देते हुए असरगंज को नगर पंचायत क्षेत्र घोषित किया था । वहीं दरभंगा जिलों का दो नगर निकायों के क्षेत्र का विस्तार किया था । अब बिहार के जिलों से आये नये प्रस्ताव पर शीघ्र ही कैबिनेट की मुहर लगाई जायेगी । बिहार के जिलों से आये नये प्रस्ताव रिपोर्ट को लेकर सरकार द्वारा नगर निकाय क्षेत्रों में विस्तार किया जाता है तो तकरीबन तीन हजार वार्ड सदस्य एवं पंचों का कार्यकाल छह महीने में समाप्त हो जायेगा तो वहीं कई मुखिया-सरपंच की कुर्सी भी चली जायेगी । उदाहरण के तौर पर मधुबनी जिला में झंझारपुर नगर पंचायत के नगर परिषद बनते ही बेहट दक्षिणी एवं उत्तरी पंचायत के 2 मुखिया एवं 2 सरपंच तथा दर्जनों पंच-वार्ड सदस्य तो मुंगेर जिले के असरगंज नगर पंचायत बनने से 1 मुखिया एवं 1 सरपंच के अलावा 50 से अधिक पंच और वार्ड सदस्यों की कुर्सी खिसक चुकी है । बताते चलें कि बिहार सरकार ने नये नगर निकायों के गठन सम्बन्धित मानकों में बदलाव का निर्णय 6 मई 2020 को लिया था । इसके बाद तेजी से अनुमंडल मुख्यालय वाले शहरों की पात्रता नगर निकाय बनाने के लिए बढ़ गई थी । अब वित्त आयोग से शहरी निकायों को गांव की अपेक्षा ज्यादा अंशदान मिलेगा तो राज्यांश एवं केन्द्रांश की हिस्सेदारी मिलेगी । डेढ़ साल पहले बिहार का शहरीकरण मात्र ग्यारह प्रतिशत था जो देश भर में सबसे कम था । नये निकाय बनने से बिहार राज्य में शहरीकरण का प्रतिशत तेजी से बढ़ने की उम्मीद जगी है । बताया जाता है कि पंचायतीराज मंत्री सम्राट चौधरी के अनुसार अभी तक करीब तीन हजार पंच एवं वार्ड सदस्यों का क्षेत्र नये नगर निकायों के गठन के बाद शहरी क्षेत्र में चला गया है । हलांकि यह सत्यापित आंकड़े नहीं है । बिहार के जिलों से त्रिस्तरीय ग्राम कचहरी एवं पंचायतों की कितने जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र शहरी आबादी वाले इलाकों में चला गया है इसकी अधिकारिक जानकारी मांगी गई है ।

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