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पूर्णिया: सभी अस्पतालों का लक्ष्य प्रमाणीकरण कराना लक्ष्य: यूनिसेफ़

पूर्णिया,बिहार दूत न्यूज।।
राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के उद्देश्य से लक्ष्य कार्यक्रम के तहत ज़िलें के सभी स्वास्थ्य केंद्रों को लक्ष्य प्रमाणीकरण के रूप में शामिल करने के लिए राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय सह अस्पताल परिसर के एएनएम स्कूल के सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का अयोजन किया गया।

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यूनिसेफ के राज्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. शिद्धार्थ शंकर रेड्डी ने बताया कि जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों का लक्ष्य प्रमाणीकरण किया जाना है। अभी तक ज़िले के पांच स्वास्थ्य केंद्रों का लक्ष्य प्रमाणीकरण किया जा चुका है ।जबकि अन्य स्वास्थ्य केंद्रों का लक्ष्य प्रमाणीकरण किया जाएगा। अभी तक राज्य के 37 स्वास्थ्य केंद्रों का लक्ष्य प्रमाणीकरण किया जा चुका है। इस अवसर पर यूनिसेफ पटना की ओर से आये स्वास्थ्य सलाहकार डॉ गौरव ओझा, क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक नजमूल होदा, यूनिसेफ़ के क्षेत्रीय सलाहकार शिव शेखर आनंद, जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से जिला गुणवत्ता यकीन सलाहकार अनिल कुमार सिंह, यूनिसेफ़ के मोअम्मर हाशमी, तनुज कौशिक, नंदन कुमार झा सहित ज़िले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, अस्पताल प्रबंधक, बीएचएम एवं प्रसव कक्ष की प्रभारी सहित कई अन्य स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे।
-स्वास्थ्य केंद्रों में रख रखाव की अद्दतन स्थिति को बेहतर करने को लेकर दिया गया प्रशिक्षण: डॉ गौरव ओझा
यूनिसेफ़ के सलाहकार डॉ गौरव ओझा ने बताया स्वास्थ्य केंद्रों के प्रसव कक्ष के रख रखाव की अद्दतन स्थिति को लेकर बताया गया है। इसके साथ ही अस्पताल के प्रसव रूम, ओटी, मेटरनिटी वार्ड, एसएनसीयू सहित कई अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रशिक्षण दिया गया है। ताकि ज़िलें के सभी अस्पतालों का लक्ष्य प्रमाणीकरण किया जा सके। प्रसव से जुड़ी हुई सेवाओं को बेहतर करने के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। विभिन्न प्रसव केंद्रों में पहले से ही संस्थागत प्रसव को लेकर कई तरह के आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 संक्रमण काल के दौरान मरीजों के द्वारा सबसे ज्यादा सरकारी अस्पताल का चयन किया गया है। क्योंकि निजी नर्सिंग होम या चिकित्सकों के प्रति जो विश्वास था वह इस कोरोना काल में समाप्त हो चुका है। सबसे ज्यादा सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक, नर्स व कर्मचारियों के प्रति विश्वास बढ़ा है।
प्रसव कक्ष एवं मैटरनिटी ओटी के लिए अलग से होती हैं व्यवस्था: आरपीएम
क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक नजमुल होदा ने बताया लक्ष्य योजना के तहत भारत सरकार द्वारा प्रसव कक्ष व मैटरनिटी ओटी के लिए प्रमाणीकरण के लिए अलग से व्यवस्था होती है। जो मानक स्तर पर प्रसव से संबंधित सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद ही दी जाती हैं। लक्ष्य कार्यक्रम को लेकर टीम के द्वारा अस्पताल स्तर पर क्वालिटी सर्किल टीम, जिला स्तर पर जिला गुणवत्ता यकीन समिति, रिजनल स्तर पर रिजनल कोचिंग टीम के स्तर से निरीक्षण के बाद ही निर्धारित मानकों के आधार पर कम से कम 70 प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त होने के बाद इसे राज्य स्तर पर मान्यता के लिए भेजा जाता है। इसके साथ ही राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा गठित टीम के द्वारा प्रसव कक्ष और ओटी के निरीक्षण के बाद ऑडिट की जाती है। मुख्यालय के टीम द्वारा विभिन्न मानकों के निरीक्षण में कम से कम 70 प्रतिशत अंक प्राप्त होने चाहिए। तभी राज्यस्तरीय टीम के द्वारा उसे प्रमाण पत्र दिया जाता है। राज्यस्तरीय प्रमाण पत्र के बाद इसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के पास भेजा जाता है। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर की टीम अस्पताल का निरीक्षण व ऑडिट करती है। कम से कम 70 प्रतिशत अंक मिलने पर ही लक्ष्य प्रमाणीकरण प्राप्त होता है।
ज़िलें के सभी अस्पतालों का लक्ष्य प्रमाणीकरण कराना लक्ष्य: यूनिसेफ़
यूनिसेफ़ के क्षेत्रीय सलाहकार शिव शेखर आनंद ने बताया कि लक्ष्य कार्यक्रम का मूल उद्देश्य, प्रसूति विभाग से संबंधित सभी तरह की सुविधाओं को सुदृढ़ बनाना और इससे जुड़ी हुई सेवाओं की गुणवत्ता में पहले की अपेक्षा सुधार लाना होता है। जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, प्रसव के बाद जच्चा बच्चा को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिहाज से लक्ष्य प्रमाणीकरण बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि जिले के विभिन्न अस्पतालों के प्रसव केंद्र में पहले से ही बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। लेकिन इसके बावजूद ज़िले के सभी अस्पतालों का लक्ष्य प्रमाणीकरण कराना लक्ष्य है। जिसके लिए अस्पताल का भौतिक सत्यापन किया जाता है। इसके तहत प्रसव कक्ष, मैटरनिटी सेंटर, ऑपरेशन थियेटर व प्रसूता के लिए बनाये गए एसएनसीयू की गुणवत्ता में सुधार लाना है।

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