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आधारभूत संरचना में बदलाव के कारण संस्थागत प्रसव की बदल रही है तस्वीर: सिविल सर्जन

पूर्णिया,बिहार दूत न्यूज।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा संस्थागत प्रसव में मातृ एवं मृत्यु दर के अनुपात को कम करने को लेकर एक महत्वपूर्ण रणनीति के तहत कार्य किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण-05 के आंकड़ों के अनुसार 76% संस्थागत प्रसव सरकारी संस्थानों में तथा 20% निजी संस्थानों में होता है। लेकिन वर्ष 2021-22 के नए एचएमआईएस पोर्टल के अनुसार जनवरी-2022 तक ज़िले में 71% एएनसी के विरुद्ध 70% संस्थागत प्रसव हुआ है। इससे संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा करने के बाद राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के अधीक्षक के साथ ही सिविल सर्जनों को पत्र जारी कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया है।

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-आधारभूत संरचना में बदलाव के कारण संस्थागत प्रसव की बदल रही है तस्वीर: सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ एसके वर्मा ने बताया ने बताया गर्भवती महिलाओं के प्रसव से संबंधित प्रबंधन की दिशा में एएनएम, आशा कार्यकर्ता एवं आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर जागरूकता लाने और विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर आधारभूत संरचना में बदलाव लाने के कारण संस्थागत प्रसव की तस्वीर बदल रही है। जिसका परिणाम है कि अप्रैल 2021 से जनवरी 2022 तक 60,331 गर्भवती महिलाओं का जिले में संस्थागत प्रसव कराया गया है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गर्भवती महिलाओं को प्रसव के बाद जननी बाल सुरक्षा योजना से जोड़ते हुए उसका लाभ दिया जाता है। इसके अलावा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत प्रत्येक महीने के 9 वें दिन प्रसव पूर्व गर्भवती महिलाओं की पूर्ण जांच की जाती है। जिसमें गर्भवती महिलाओं का गर्भधारण से लेकर प्रसव पूर्व तक पूर्ण जांच राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय सह अस्पताल से लेकर ज़िले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर की जाती है। आगे उन्होंने यह भी बताया की सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव बहुत ज़्यादा जरूरी है। इसके लिए संस्थागत प्रसव स्वास्थ्य केंद्रों में महिला रोग विशेषज्ञ, प्रशिक्षित स्टाफ़ नर्स एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की देख-रेख में कराया जाता है। अस्पतालों में मातृ एवं शिशु सुरक्षा के लिए भी सभी तरह की आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। इसके साथ ही किसी भी आपात स्थिति जैसे- रक्त की कमी या एस्पेक्सिया जैसी अन्य गंभीर समस्याओं से निपटने की तमाम तरह की सुविधाएं अस्पतालों में उपलब्ध रहती हैं।

 

-जननी बाल सुरक्षा योजना से संस्थागत प्रसव में हुआ इज़ाफ़ा: डीपीएम
जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसूता महिलाओं को प्रसव कराने के बाद सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि दी जाती है। जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को 1400 रुपये एवं शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके साथ ही इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सरकारी अस्पतालों पर संस्थागत प्रसव कराने के लिए आशा कार्यकर्ता को भी प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। जिसमें प्रति प्रसव ग्रामीण क्षेत्रों में आशा को 600 रुपये एवं शहरी क्षेत्रों के लिए आशा को 400 रुपये की प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाती है। इस योजना के तहत संस्थागत प्रसव में काफ़ी इज़ाफ़ा हुआ है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के बीच जागरूकता भी बढ़ी है।

 

-सबसे ज्यादा बनमनखी एसडीएच में 7037 हुआ संस्थागत प्रसव:
जिले के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में संस्थागत प्रसव से संबंधित आंकड़ों की बात करें तो विगत 10 महीने में 60331 गर्भवती महिलाओं का संस्थागत प्रसव कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित एचएमआईएस पोर्टल के अनुसार जिला अस्पताल, पूर्णिया ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में 6603, रुपौली में 4881, श्रीनगर में 3120, के नगर में 3609, कसबा में 3680, जलालगढ़ में 3205, धमदाहा में 5621, डगरुआ में 4323, भवानीपुर में 3907, बी कोठी में 3429, बनमनखी में 7037, बायसी में 3980, बैसा में 2974 एवं अमौर स्वास्थ्य केंद्र में 3962 संस्थागत प्रसव कराया गया है।

 

-शत प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति में सभी स्वास्थ्यकर्मियों का मिला सहयोग: एमओआईसी
अनुमंडलीय अस्पताल बनमनखी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ प्रिंस कुमार सुमन ने बताया कि हमारे यहां विगत दस महीनों में 07 हजार 37 संस्थागत प्रसव कराया गया है जो ज़िलें में सबसे अधिक है। क्योंकि अस्पताल से जुड़े चिकित्सक, जीएनएम, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, ममता एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा जागरूकता के साथ ही स्थानीय लोगों का सहयोग हमेशा से मिलते आ रहा है। हमें आशा ही नही बल्कि पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में भी इसी तरह का सहयोग मिलते रहेगा। गर्भवती महिलाओं में कभी-कभी ऐसा भी देखने को मिलता है जिसमें गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य या जीवन को खतरा अधिक होता है। किसी भी गर्भावस्था में जहां जटिलताओं को संभावना अधिक होती है, उस गर्भावस्था को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी या उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में रखा जाता है। इस तरह की गर्भावस्था को प्रशिक्षित चिकित्सक के द्वारा विशिष्ट रूप से देखभाल की आवश्यकता होती है।

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