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RJD प्रवक्ता एजाज अहमद ने BJP पर कसा तंज, कहा भाजपा नेताओं की बौखलाहट सत्ता की कुर्सी छिन जाने पर दिख रही है

पटना: बिहार प्रदेश राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि बिहार में सत्ता से होते ही भाजपा की बौखलाहट दिखने लगी है, ये बौखलाहट सिर्फ कुर्सी के लिए है। जैसे ही सत्ता उनके हाथ से निकली, बेरोजगारी में धरना एवं प्रदर्शन करते दिखाई देने लगे हैं लेकिन उन्हें जनता का समर्थन नहीं मिला।

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इन्होंने ने कहा कि भाजपा नेताओं की बौखलाहट सत्ता की कुर्सी छिन जाने पर दिख रही है।
जैसे ही सत्ता उनके हाथ से निकली है, ये जंगलराज की रट लगाने लगे हैं,जबकि जंगलराज की परिभाषा क्या है यह भाजपा के नेता नहीं बता पाते हैं, क्योंकि इन्हें पता है कि गरीबों, शोषितों, वंचितों, बेरोजगार नौजवानों, किसानों, मजदूरों ,पिछड़ों, अति पिछड़ों, दलितों तथा अल्पसंख्यक के साथ – साथ ए -टू- जेड को महागठबंधन कि सरकार हर तरह की भागीदारी दे रही है और इन वर्गों का साथ मिलने के कारण ही भाजपा नेताओं में बेचैनी देखने को मिल रही है और एक सप्ताह के अंदर ही ऐसा लग रहा है कि बिहार में भाजपा से सब कुछ छीन लिया गया है और भाजपा पूरी तरह से बेरोजगार हो गई है । एजाज ने कहा कि भाजपा को मेरी यह सलाह है कि कुर्सी के लिए नहीं, कभी जनता और जनसरोकार के मुद्दों के लिए भी धरना, प्रदर्शन भ करे लेकिन भाजपा के नेता यह बात करेंगे नहीं क्योंकि उन्हें पता है कि रोजगार के सवाल पर उन्होंने सिर्फ जुमला बाजी की है महंगाई बढ़ाने के लिए खाने के सामानों पर भी जीएसटी लगाने और बिहार को विकास से दूर रखने के लिए केंद्र सरकार के द्वारा ना तो विशेष पैकेज दिया गया और ना ही विशेष राज्य का दर्जा ही मिला। हद तो यह है कि बिहार में सुखाड़ की स्थिति है लेकिन केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है और ना ही बिहार के बेरोजगार भाजपा नेता इस पर कुछ बोल रहे हैं। इन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भाजपा का पोल खोल कर रख दिया और उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाजपा विकास और मुद्दों की राजनीति नहीं करती बल्कि सत्ता और कुर्सी के लिए कुछ भी कर रही है, जिससे देश को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। क्योंकि आज ना तो जवान खुश है ना नौजवान खुश है न ही छात्र खुश है और ना ही महिलाएं, मजदूर और किसान ही खुश हैं, सभी बदहाली की जिंदगी जी रहे हैं।
एजाज ने कहा कि जहां देश में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 2014 तक 21 करोड़ थे वहीं अब 8 वर्षों के बाद बढ़कर 80 करोड़ के करीब पहुंच गए हैं।

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