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सरकारी अस्पताल में हुआ इलाज, ठीक हुआ तो बन गया टीबी चैम्पियन..

पूर्णिया, बिहार दूत न्यूज़।

पूर्णिया जिला के श्री नगर प्रखंड में है गढ़िया बलुआ गांव। यही के निवासी हैं राजेंद्र चौहान। उनके ही 23 वर्षीय पुत्र हैं मनेंद्र कुमार। मनेंद्र को मई 2020 के दौरान सीने में दर्द हुआ। हल्का बुखार और हल्की खांसी, थकान व कमजोरी महसूस होने लगी। गांव के ही ग्रामीण चिकित्सक के पास गये और इलाज कराया। दो महीने तक उनकी दवा खाई पर कोई सुधार नहीं हुआ। मामी के कहने पर सरकारी अस्पताल गये। स्थानीय आशा कार्यकर्ता माला देवी ने इसमें मदद की। सरकारी अस्पताल में जांच एवं उपचार निःशुल्क हुई। दवा भी मुफ्त में मिली। डॉक्टर के कहे अनुसार लगातार दवा खाई। नियमित रूप से समय पर भोजन करने लगे और पौष्टिक आहार के रूप में हरी सब्जियां, अंडा, मछली आदि को भोजन में शामिल किया। इसके बाद वे पूरी तरह स्वस्थ हो गये। दिसंबर 2021 में उनको रीच इंडिया द्वारा टीबी चैंपियन बना दिया गया।

कसबा में खोजा 120 टीबी मरीज, 34 हुए स्वस्थ: टीबी चैंपियन मनेंद्र
टीबी चैंपियन मनेंद्र कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्य़क्रम (एनटीईपी) को सहयोग करने वाली संस्था रीच इंडिया ने पहले मुझे दरभंगा एवं गया में प्रशिक्षित किया। इसके बाद रीच इंडिया द्वारा कसबा प्रखंड में कार्य करने के लिए रखा गया है। उसके बाद से सामुदायिक स्तर पर बैठक, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका एवं जीविका समूह की दीदियों के साथ बैठक कर लोगों को जागरूक कर रहा हूं। अभी तक हमने 120 नये टीबी मरीज़ों की खोजा है। इसमें 34 मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं।

कुपोषण के कारण टीबी संक्रमण के अधिक मामले: एसटीएस ममता
श्री नगर पीएचसी में कार्यरत एसटीएस ममता कुमारी ने बताया कि जनवरी से अगस्त 2022 तक 59 मरीजों को चिन्हित किया गया था। जिसमें सभी लोगो का उपचार किया गया। कुछ लोग ठीक हो चुके हैं तो कुछ मरीजों का दवा अभी भी चल रहा है। स्थानीय क्षेत्र में टीबी मरीज़ों सहित ग्रामीणों को पौष्टिक आहार खाने के लिए समय-समय पर बैठक आयोजित कर जागरूक किया जाता है। टीबी से बचाव एवं सुरक्षित रहने के लिए सबसे ज्यादा पोषण की आवश्यकता होती है। अगर सही पोषण नहीं मिला तो लोग कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। जब आपका शरीर कुपोषित रहेगा तो उस समय टीबी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसीलिए मरीज़ों को संतुलित आहार लेने की आवश्यकता सबसे ज्यादा होती है। वहीं निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी मरीजों को इलाज के दौरान 500 रुपए प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि के रूप में उनके बैंक खाते में भेजी जाती है।

टीबी संक्रामक बीमारी तो है, लेकिन इसका इलाज संभव है: डॉ साबिर
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ साबिर ने बताया कि वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग कृतसंकल्पित है। ज़िले की वस्तुस्थिति एवं उन्मूलन में आ रही चुनौतियों का सामना करने के लिए स्थानीय जिला प्रशासन, स्वास्थ्य एवं यक्ष्मा विभाग लगातार प्रयास कर रही है। डॉ साबिर ने कहा कि टीबी संक्रामक बीमारी जरूर है, लेकिन अब इसका इलाज संभव हो गया है। इस बीमारी से बचाव एवं सुरक्षित रहने के लिए स्थायी रूप से जांच एवं समुचित इलाज कराना निहायत ही जरूरी है। इसीलिए लक्षण दिखते ही निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर अपनी जांच अवश्य कराएं। जांच कराने में कोई संकोच या लापरवाही नहीं  बरतें। जांच के बाद चिकित्सकों की सलाह का पालन करना सुनिश्चित करें। यही इस बीमारी से स्थायी रूप से निजात और बचाव का सबसे कारगर उपाय है।

टीबी संक्रमण से संबंधित लक्षण:
-भूख नहीं  लगना, कम लगना और अचानक वजन का कम होना।
-शरीर में बेचैनी एवं सुस्ती रहना, सीने में दर्द का अहसास होना, थकावट व रात में पसीना आना।
-खांसी एवं खांसी में बलगम और बलगम में खून का आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
-गहरी सांस लेते समय सीने में दर्द होना।
-कमर की हड्डी पर सूजन एवं घुटने में दर्द की शिकायत।
-बुखार के साथ गर्दन में जकड़न।

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