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आयुर्वेद संस्थान के कल्याण समिति में पूर्ववर्ती छात्र संघ के वरिष्ठ छात्रों को रखा जाए: चौधरी..

पटना : लोकतांत्रिक लोक राज्यम पार्टी के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित कुमार चौधरी ने दरभंगा जिलाधिकारी को आवेदन दे कर कई गंभीर आरोप लगाएं। उन्होंने कहा कि राजकीय महारानी रमेश्वरी भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान मोहनपुर दरभंगा बिहार आयुर्वेद संस्था के प्राचार्य द्वारा स्पष्टीकरण आप को दिया गया है, वह वस्तु स्थिति के ठीक विपरीत है,और संस्थान के कुकृत्य पर झापन देने का प्रयास है, जो जघन्य अपराध है।
लोकतांत्रिक लोक राज्यम पार्टी अखिल भारतीय स्तर पर भ्रष्टाचार मुक्त और मूल्य- व्यवस्थागत स्थापना के प्रयास में परिकल्पित और क्रियाशील है।
दरभंगा का यह राजकीय म० र० भा० चि० वि० संस्थान, मोहनपुर, दरभंगा का आयुर्वेद संस्थान कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा स्वत: प्रेरित होकर अंगीभूत इकाई के रूप में 15 सितंबर 1975 में स्थापित किया गया था जिसे पूर्ववर्ती छात्रों द्वारा उग्र आंदोलन कर सरकारी करण कराई गई थी और परिणाम विडंबना पूर्ण यह निकला की इसके प्राचार्य से लेकर प्राध्यापक-कर्मचारीगण-सरकारी कर्मी नौकर होते ही संस्थानगत मूल्य को सरकाते हुए बर्बाद करते चले गए, संस्थान में नामांकन बंद हो गया, और संस्थान तहस-नहस मृतवत हो गया तथा संस्थान को दी गई राशियों का इन सरकारी नौकरो द्वारा वेतनमद से लेकर भोगबाद में बंदरबांट कर खत्म कर दिया गया।
इस आयुर्वेद संस्थान के सरकारी करण के बाद से हालात बिगड़ती ही चली गई और वर्तमान में भी यहां के पदस्थापित प्राचार्य, अध्यापक, चिकित्सक और कर्मचारीगण राजकीय भेदभाव में लूट-खसोट में सलंग्न है, जो इनके क्रियाकलाप से परिलक्षित होता है, जो कि विचारणीय है।
स्थिति के स्पष्टता हेतु कहना है कि हमारे राष्ट्रहित में पार्टी लोकतांत्रिक लोक राज्यम पार्टी के संरक्षक- सह स्वतंत्र प्रभाग प्रमुख प्राध्यापक डॉ महेंद्र लाल दास दरभंगा आयुर्वेद संस्थान की स्थापना काल के छात्र रहे हैं और कई आयुर्वेदिक कॉलेज में अध्यापन-चिकित्सा का अनुभव लिए हुए हैं और समाज, राज्य और देश हित में शाश्वत और मूल्य परक स्थापना हेतु प्रयासरत-कर्तव्यपरायण रहते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत सरकार का शिक्षा विभाग अपने शिक्षा संस्थान के पूर्ववर्ती छात्रों का अपने जनक संस्थान के प्रति स्वेच्छा से संस्थान को सेवा-अनुभव देने का आग्रह-अपेक्षा रखते हैं और भारत के कई शिक्षा संस्थानों में यह व्यवहारिक रूप ले चुका है।
ज्ञातव्य बात यह है कि बिहार के कई चिकित्सा,महाविद्यालयों में और यहीं दरभंगा चिकित्सालय महाविद्यालय दरभंगा में
सेवानिवृत्त प्रध्यापकों का सेवा लिया जा रहा है और बिहार सरकार भी अपने सेवानिवृत्त कई कर्मचारियों का उनके ही विभाग में सेवा ले रही है। इसी संस्थान के पूर्ववर्ती छात्र जो अब आयुर्वेदिक चिकित्सक प्राध्यापक रूप में कार्य और अनुभव लिए हुए हैं, अपनी सेवानिवृत्त के बाद हुए वे इस संस्थान से प्रेम होने के आयाम में सेवा विकास भाव से संस्थान के स्थापना- विकास में भागीदारी देना चाहते हैं।
इनके भावना का कद्र करते हुए एक सूची भी पूर्व में प्राचार्य और संबंधित स्वास्थ्य मंत्री को मेरे द्वारा दी गई है जिससे यह दबाव कह कर उन्हें आरोपित कर रहे हैं और वरिष्ठ नागरिक के सेवाभाव का अपमान कर रहे हैं जो अक्षम्य है।

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हमने आॻह किया था कि संस्थान के विकास-स्थापना में इस आयुर्वेद संस्थान के कल्याण समिति में पूर्ववर्ती छात्र संघ के वरिष्ठ छात्रों को रखा जाए और उनके अनुभव का उपयोग किया जाए, लेकिन प्राचार्य और अपने मनमौजी में कल्याण समिति का गठन किया है जो समस्या का कारण है।

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