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किसान मेला: बिना इंटरनेट के वीडियो देखकर खेती करेंगे किसान..

बिहार दूत न्यूज, पटना।
बामेती, पटना में ‘‘ग्रामीण आजीविका में सुधार एवं सुरक्षा के लिए प्रौद्योगिकियाँ’’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय किसान मेला-सह-कृषि प्रदर्षनी का उद्घाटन किया गया तथा स्टाॅल का अवलोकन किया गया एवं ‘कृषक संदेश’ पुस्तिका का लोकार्पण भी किया गया।
जिसकी उद्घाटन डाॅ॰ एन॰ सरवण कुमार, सचिव, कृषि विभाग ने फीटाकाटकर किया।


इस प्रदर्शनी में एक जिला, एक उत्पाद के तहत् कतरनी धान, जर्दालू आम, जी॰ 09 केला, स्ट्राॅबेरी, जूट उत्पाद, मधु उत्पाद, मखाना, ड्रेगन फ्रूट, अनानास, मगही पान एवं औषधीय व सुगंधीय प्रादर्श शामिल है। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किये गये नवीनत्तम तकनीकों का प्रदर्शन, विभिन्न प्रकार के बीजों और जीवंत पौध-सामग्री का प्रदर्शन एवं विपणन, किसानों के उत्पादों का प्रदर्शन एवं बिक्री और उद्यान प्रदर्शनी लगायी गयी है।
इस मेला में कृषि क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित किया गया।
कृषि एवं सम्बद्ध विषयों पर आधारित फिल्मों को माइक्रो एस० डी० कार्ड के माध्यम से प्रगतिशील किसानों और प्रसार कार्यकर्ताओं तक बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर पहुँचा रहा है। इस कार्ड के माध्यम से किसान अब अपने स्मार्ट फोन के माध्यम से वैसे जगह पर भी कृषि और सम्बद्ध विषयों की फिल्मों को देख पा रहे हैं, जहाँ 4जी॰ नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। 32 जी० बी० के माइक्रो एस० डी० कार्ड में लगभग 60 तकनीकी फिल्म और 70 सफलता की कहानियों के अलावा कई एग्रो टिप्स पर आधारित 170 फिल्में उपलब्ध हैं। इस कार्ड को मोबाईल में डालकर ‘एग्री वीडियो ऐप’ इंस्टॉल करना होता है, जो कि इसी कार्ड में उपलब्ध होता है। इस ऐप में सभी फिल्में मौसम और महीने के अनुसार सूचीबद्ध होती ह,ै जो जरुरत और सहूलियत के अनुसार किसान देख पाते हैं। ऐप में फीडबैक देने और सवाल पूछने की सुविधा भी है। इसके साथ ही, अगर धीमी गति का भी इंटरनेट उपलब्ध होता है, तो इस ऐप के माध्यम से बीएयू, सबौर का एफएम ग्रीन रेडियो लाइव भी सुना जा सकता है। स्मार्ट फोन के अलावा यह कार्ड किसी भी घरेलु एल०ई०डी॰ टीवी, लैपटॉप या कंप्यूटर पर भी चलने में सक्षम रहेगा। इसके लिए कार्ड के साथ पेन ड्राइव जैसा एक कार्ड होल्डर भी दिया गया है। आज 1,000 माइक्रो एस०डी० कार्ड और कार्ड होल्डर सभी परियोजना निदेशक, आत्मा, बी॰टी॰एम॰ एवं ए॰टी॰एम॰ के बीच वितरण करने हेतु बामेती को एक आकर्षक पैक में दिया गया।
सचिव, कृषि ने अपने संबोधन में कहा कि इस किसान मेला के आयोजन का मुख्य उद्देश्य कृषि विज्ञान केन्द्रों तथा किसानों द्वारा किये जा रहे अच्छे कार्यों का प्रदर्शित करना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए इस प्रदर्शनी के महता के बारे में बताया कि मखाना की खेती बिहार में बहुत पहले से होती आ रही है, लेकिन पारम्परिक प्रभेद के मखाना के तुराई के बाद कुटाई एवं पाॅपिंग एक मुख्य समस्या रहा है। मखाना का प्रभेद सबौर मखाना-1 को खेतों में भी किया जा सकता है और इसके काफी अच्छे परिणाम प्राप्त हो रहे हैं तथा इस प्रभेद का विस्तार काफी तेजी से हो रहा है।
डाॅ॰ कुमार ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय का तीन प्रमुख कार्य यथा अनुसंधान, शिक्षा तथा प्रसार है। इसमें सबसे महत्त्वपूर्ण प्रसार गतिविधि है, क्योंकि आज विश्व में कृषि के क्षेत्र में नई तकनीकों का विकास हो रहा है, इसे किसानों के खेत तक पहुँचाया जाये, यह सबसे बड़ी चुनौती है। प्रसार में वही लोग सफल हो पाते हैं, जो किसानों के साथ संवाद कौशल में प्रवीण हो। आज कृषि वैज्ञानिकों के पास भले ही ज्ञान का भण्डार हो, पर जब तक किसान तक ज्ञान पहुँचेंगे नहीं और किसान इसे समझंेगे नहीं, तब तक नई तकनीकों को धरातल पर लाना संभव नहीं होगा। प्रदर्शनी, परिभ्रमण तथा प्रत्यक्षण के माध्यम से ‘देखकर सीखो’ तथा ‘करके देखो’ के सिद्धांत पर किसानों को नई तकनीकों के बारे में विश्वास हो पायेगा। राज्य में कई नई तकनीकों का विकास हुआ है, तकनीकी हस्तांतरण में निजी सहभागिता पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कृषि विज्ञान केन्द्रों की भूमिका अहम् है, राज्य सरकार की प्राथमिकता पर कृषि विज्ञान केन्द्रों में कार्य होने चाहिए। उन्होंने मेला में आये किसानों को से अपील किया कि राज्य सरकार द्वारा कृषि को बहुत प्राथमिकता दिया जा रहा है। वर्ष 2008 से कृषि रोड मैप के लगातार क्रियान्वयन के उपरान्त बीज प्रतिस्थापन दर तथा यांत्रिकरण में वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन एक बहुत बड़ा मुद्दा है, इसका एक उदाहरण है उन्होंने बताया कि इस मेला में आये औरंगाबाद के एक किसान द्वारा कहा गया कि इस मार्च महीना में ही, अधिक गर्मी पड़ने के कारण स्ट्राॅबेरी का आकार छोटा हो गया है। फसल कटनी के बाद पुआल/पराली जलाने की प्रवृति बढ़ी है। हमें किसानों को समझाना होगा कि पुआल/पराली को जलायें नहीं बल्कि, उसका प्रबंधन करें, क्योंकि फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरा-शक्ति को नुकसान पहुँचता है। राज्य सरकार के जल-जीवन-हरियाली अभियान तथा सात निश्चय-2 कार्यक्रम में कृषि विभाग की अहम् भूमिका है। हर खेत तक सिंचाई का पानी अंतर्गत दक्षिणी बिहार के 17 के जिलो में 1,480 चैक डैम का निर्माण किया जाना है तथा अगले 05 वर्षों में 01 लाख एकड़ क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई के उपयोग किया जाना है। उन्होंने फसलों के उत्पाद एवं उत्पादकता में बढ़ोत्तरी के उपरान्त कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्द्धन के लिए किये जा रहे कार्यों के संबंध में किसानों से चर्चा भी की।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ॰ अरूण कुमार ने कहा कि किसान मेला किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है। मेला में किसान नवीनत्तम कृषि तकनीकों से रूबरू होते हैं और कृषक अपनी आय की बढ़ोत्तरी का गुर सीखते हैं।
इस मौके पर विशेष सचिव, कृषि विभाग श्री बिजय कुमार, उप निदेशक (शष्य), शिक्षा श्री अनिल कुमार झा, निदेशक प्रसार शिक्षा (बी॰ए॰यू॰) डाॅ॰ आर॰के॰ सोहाने, निदेशक बामेती डाॅ॰ जितेन्द्र प्रसाद, विभागीय मुख्यालय पदाधिकारी, वैज्ञानिकगण सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आये किसान मौजूद थे।

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