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बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पर निकाला गया कैंडल मार्च..

संजय भारती , समस्तीपुर

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समस्तीपुर के स्टेशन चौक पर स्थित गांधी स्मारक पर कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन और जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र एवं जिला के तमाम समाजिक संगठनों द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शुरुआत कैंडल मार्च के द्वारा किया गया । जहाँ बताया गया कि नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के नेतृत्व में ऐतिहासिक ‘बाल विवाह मुक्‍त भारत’ अभियान का हुआ शुभारंभ, जागरुकता के लिए दस हजार गावों में जलाए गए दीये ।

*बाल विवाह के खिलाफ दुनिया का सबसे बड़ा अभियान*

*देशभर के 500 जिलों में लोगों को जागरुक करने के लिए 70 हजार महिलाओं और बच्चों के नेतृत्व में जलाया गया दीया*

*राज्य सरकारों नें भी लिया अभियान में हिस्सा*

देश में बाल विवाह की बुराई को खत्म करने के लिए लोगों को जागरुक करने के मकसद से शुरु किया गया “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान का आज आगाज हो गया। तीन साल तक चलने वाले ऐतिहासिक ‘बाल विवाह मुक्‍त भारत’ अभियान का नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी और लेमा जोबोई नें राजस्‍थान से दीप जलाकर कर शुभारंभ किया। राजस्थान स्थित विराटनगर के बंजारा समुदाय की बहुलता वाले नवरंगपुरा गांव में इस अभियान के शुभारंभ नें एक नया इतिहास रच दिया। आजाद भारत में हीं नहीं बल्कि दुनिया में बाल विवाह जैसे सामाजिक मुद्दे पर इतना बड़ा अभियान पहली बार जमीनी स्‍तर पर शुरु हो रहा है, जिसमें देशभर के हजारों गांवों में लाखों लोगों नें दीया जला कर इस सामाजिक बुराई को खत्म करने का प्रण लिया। इस अभियान को राज्‍य सरकारों ने भी अपना समर्थन दिया है।

कैलाश सत्यार्थी नें बाल विवाह रूपी सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए लोगों से इसके खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया था। जिसका आज राजस्थान के विराट नगर के नवरंगपुरा गांव में एक विशाल जनसभा करके इसका विधिवत शुभारंभ किया गया। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ) के नेतृत्व में शुरु हुआ “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान, लड़कियों के बाल विवाह के खिलाफ देश का सबसे बड़ा जागरुकता अभियान बन गया। इस अभियान के तहत आज देशभर के 26 राज्‍यों में 500 से अधिक जिलों में करीब 10 हजार गांवों (केएससीएफ द्वारा 6,015 गांवों में बाकी सरकार और अन्य संस्थाओं द्वारा) की 70,547 महिलाओं और बच्चों के नेतृत्व में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित कर दीया जलाया गया और कैंडिल मार्च निकाला गया। इस अभियान में दो करोड़ से अधिक लोगों नें हिस्सेदारी कर बाल विवाह को खत्म करने की शपथ थी। बाल विवाह बच्‍चों की शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा, तीनों पर हीं गंभीर प्रभाव डालता है। कई सतत् विकास लक्ष्‍य (एसडीजी) में भी बाल विवाह के खात्‍मे को प्राथमिकता दी गई है। बाल विवाह जैसी वैश्विक बुराई को खत्‍म करने के लिए कई स्‍तर पर एकजुट प्रयास करने होंगे।

इसी क्रम में बिहार राज्‍य की जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र संस्‍था नें कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन के सहयोग से समस्तीपुर जिलों में कैंडल मार्च कार्यक्रम का आयोजन किए। बाल विवाह के खिलाफ जागरुकता अभियान के इस दीप जलाओ कार्यक्रम में 500 लोग शामिल हुए और बाल विवाह को खत्‍म करने का संकल्‍प लिया।
इस मौके पर सुरेन्द्र कुमार, डॉ मिथलेश कुमार, अधिवक्ता संजय कुमार बबलू, कौशल कुमार, अमित कुमार वर्मा, दीप्ति कुमारी, प्रवीण कुमार फुलबाबु, सोनाली कुमारी समेत बड़ी संख्‍या में गणमान्‍य हस्तियां उपस्थित रहीं। जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के सुरेन्द्र कुमार ने कहा, ‘ श्री कैलाश सत्‍यार्थी नें लोगों को जागरूक कर बाल विवाह के प्रति उनकी सोच व व्‍यवहार में बदलाव लाने और बच्‍चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया है। इसी के लिए उन्‍होंने इस अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तीन मुख्‍य लक्ष्‍य हैं। पहला कानून का सख्‍ती से पालन हो, यह सुनिश्चित करना। दूसरा, महिलाओं और बच्‍चों का सशक्‍तीकरण करना और 18 साल तक के सभी बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था करना। जबकि तीसरा उन्‍हें यौन शोषण से बचाना है।’

बाल विवाह को लेकर ग्रासरूट लेबल पर एक दिन में इतने बड़े पैमाने पर कार्यक्रम पहली बार आयोजित हुआ है। देश के कोने-कोने और दूरदराज में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, नौजवान, डॉक्टर, प्रोफेशनल्स, महिला नेत्री, वकील, शिक्षक, शिक्षाविद् और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं नें भी जम कर हिस्सा लिया। अभियान में नागरिक संगठन और स्वयंसेवी संस्थाओं नें भी बड़ी तादाद में हिस्सा लिया और कार्यक्रम भी आयोजित किए। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की खास बात यह थी कि सड़कों पर उतर कर नेतृत्व करनें वाली महिलाओं में, ऐसी महिलाओं की संख्‍या ज्‍यादा थी जो कभी खुद बाल विवाह के दंश का शिकार हो चुकी थीं। समस्तीपुर के दो सौ गांवों में अभियान का नेतृत्व उन बेटियों नें किया, जिन्होंने समाज और परिवार से विद्रोह कर न केवल अपना बाल विवाह रुकवाया, बल्कि अपनें जैसी कई अन्य लड़कियों को भी बाल विवाह के शिकार होने से बचाया। सभी ने एकसुर में बाल विवाह को रोकने के लिए कानूनों के सख्ती से पालन करवाने की बात कही।

तीन साल तक चलने वाले इस अभियान को सरकार की तरफ से भी सहयोग और समर्थन मिल रहा है। कई सरकारी संस्थाओं नें इसमें शिरकत की। 14 राज्य सरकारों के महिला एवं बाल कल्याण विभाग, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, राज्य विधिक सेवा आयोग सहित रेलवे सुरक्षा पुलिस और जिला प्रशासन नें इस अभियान को अपना समर्थन दिया। इन संस्थाओं नें अपनें अधिकारियों को इसमें शामिल होने और आंगनवाड़ी जैसी संस्थाओं को कार्यक्रम करने का निर्देश दिया है।
भारत सरकार की साल 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 1.2 करोड़ से ज्‍यादा बच्चों के बाल विवाह हुए हैं। जिसमें करीब 52 लाख नाबालिग लड़कियां थीं। इसकी तस्‍दीक नेशनल फैमिली हेल्‍थ सर्वे के ताजा आंकड़े भी करते हैं। इनके अनुसार देश में 20 से 24 साल की उम्र की 23.3 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं, जिनका बाल विवाह किया गया है। इसमें 10 प्रतिशत की कमी लाना हीं अभियान का उद्देश्‍य है।

बाल विवाह पीड़ितों की दुर्दशा पर रौशनी डालते हुए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्‍यार्थी नें कहा, ‘बाल विवाह मानव अधिकारों और गरिमा का हनन है, जिसे दुर्भाग्य से सामाजिक स्वीकृति प्राप्त है। यह सामाजिक बुराई हमारे बच्चों, खासकर हमारी बेटियों के खिलाफ, अंतहीन अपराधों को जन्म देती है। कुछ सप्ताह पहले मैंने बाल विवाह मुक्त भारत बनाने का आह्वान किया था। इसनें सदियों पुरानें दमनकारी सामाजिक रिवाज से घुटन महसूस कर रही 70,547 महिलाओं में वह आग पैदा कर दी कि वे इसे चुनौती देने के लिए सड़कों पर उतर आई हैं। मैं लड़कियों की शादी की उम्र को 18 से बढ़ाकर 21 करने के, भारत सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करता हूं। मैं सभी धर्मगुरुओं का आह्वान करता हूं कि वे इस अपराध के खिलाफ बोलें और यह सुनिश्चित करें कि जो लोग शादियां कराते हैं, यहां तक कि गांव के स्तर पर भी, वे बच्चों के खिलाफ इस अपराध को न होने दें। शादियों में सजावट करने वाले, मैरेज हॉल मालिकों, बैंड-बाजा वालों, कैटरिंग वालों और दूसरे सभी लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे इन शादियों में अपनी सेवाएं देकर इस आपराधिक कृत्य के सहभागी न बनें। आप में से जो लोग अपने गांवों में बाल विवाह रोक रहे हैं, उनको मैं भरोसा दिलाना चाहता हूं कि आप खुद को अकेला न समझें। इस लड़ाई में मैं आपके साथ खड़ा हूं। आपके भाई के रूप में, मैं आपकी हर संभव सहायता और समर्थन करूंगा। मैं इस लड़ाई में आपका साथ नहीं छोड़ने वाला।’
इस अवसर पर नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित लाइबेरिया की लेमा जेबोई ने भी बाल विवाह पर चिंता जताते हुए कहा, ‘बाल विवाह वैश्विक स्‍तर पर एक भयावह बुराई है। हमें मानवाधिकार की हत्‍या करने वाली इस कुप्रथा का अंत करना हीं होगा।’

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