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जयंती पर याद किए गये लोक गायक भिखारी ठाकुर..

खगड़िया, बिहार दूत न्यूज।

भारतीय नाई समाज खगड़िया द्वारा जानकीचक ,सिराजपुर परबत्ता में लोक गायक भिखारी ठाकुर जी का 134 वा जयंती कार्यक्रम मनाया गया। कार्यक्रम में भिखारी ठाकुर के तैलीय चित्र जिला महामंत्री सह प्रांतीय मीडिया प्रभारी पाण्डव कुमार,कोषाध्यक्ष देवानंद ठाकुर,प्रखंड अध्यक्ष रणजीत कुमार ठाकुर, सचिव पप्पू ठाकुर ,कार्यकारिणी सदस्य रंजन ठाकुर, राकेश कुमार,कुन्दन कुमार,मनीष कुमार,राजेश कुमार द्वारा संयुक्त रूप से माल्यार्पण एवं पूष्प अर्पित कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रंजीत कुमार ठाकुर , मंच संचालन पाण्डव कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन राकेश कुमार ने किया।

कार्यक्रम में पाण्डव कुमार ने 23 दिसम्बर को आयोजित जिला नाई सम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील करते हुए कहा। भिखारी ठाकुर को महान लोक गायक बताते हुए कहा वे समाज के लोगो को गीत व नाटक के माध्यम से जगाने व कुरीतियों के खिलाफ लड़ने का काम किया करते थे। उनका जन्म 18 दिसम्बर 1887 को बिहार के सारन जिले के कुतुबपुर (दियारा) गाँव में एक नाई परिवार में हुआ था । एवं 10 जुलाई 1971 को 84 वर्ष की आयु में निधन हुआ था। भिखारी ठाकुर गीत व नाटक के माध्यम से देश में फैल रहे कुरीतियों का बहिष्कार करते थे।

रंजीत ठाकुर,रंजन ठाकुर ने कहा भिखारी ठाकुर भोजपुरी के समर्थक लोक कलाकार, रंगकर्मी लोक जागरण के सन्देश वाहक, लोक गीत तथा भजन कीर्तन के साधक थे।वे एक महान लोक कलाकार थे जिन्हें ‘भोजपुरी का शेक्शपीयर’ कहा जाता है।उन्होंने भोजपुरी समाज मे फैली कुरीतियों , अंधविश्वास, वाल विवाह,बेमेल विवाह एवं स्त्री उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष का माध्यम अपने नाटकों,गीतों तथा रचनाओं को बनाया। वे एक ही साथ कवि, गीतकार, नाटककार, नाट्य निर्देशक, लोक संगीतकार और अभिनेता थे। भिखारी ठाकुर की मातृभाषा भोजपुरी थी और उन्होंने भोजपुरी को ही अपने काव्य और नाटक की भाषा बनाया।

देवानंद ठाकुर, पप्पू ठाकुर ने कहा भिखारी ठाकुर नव जागरण के वेहद लोकप्रिय कलाकार थे। उन्होंने दलित चेतना के लिए बहुत ही सराहनीय कार्य किये है।भिखारी ठाकुर जनता के कष्ट को समझते थे। उन्होंने कई गीत व सामाजिक नाटक किये जैसे बिदेशिया, भाई-बिरोध , बेटी-बियोग या बेटि-बेचवा, कलयुग प्रेम, गबर घिचोर,गंगा स्नान (अस्नान),
बिधवा-बिलाप ,पुत्रबध, ननद-भौजाई,बहरा बहार, कलियुग-प्रेम,राधेश्याम-बहार, बिरहा-बहार,नक़ल भांड अ नेटुआ के आदि। भिखारी ठाकुर ने नाटय कला के माध्यम से दूर दूर क्षेत्र,प्रदेशों में जाकर कुंठित मानसिकता वाले समाज को जगाने का काम किये। भिखारी ठाकुर नाई जाति के थे और उनकी मंडली में शामिल ज्यादातर लोग छोटी जाती के थे।आज उनकी कला की सहजता से ही वो समाज के हर वर्ग के दिल दिमाग पर असर छोड़ रहे है।
सदस्यों ने सरकार से सभी जिलों में लोककलाकार भिखारी ठाकुर के नाम से संगीत महाविद्यालय स्थापना की मांग किया।

मौके पर मनोज ठाकुर,दिलीप कुमार,बंटी राज,रूपेश ठाकुर,विजय ठाकुर,राहुल ठाकुर,साजन,चन्दन,सुमन, दीपक ,सुधांशु आदि उपस्थित थे।

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