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नवजात शिशुओं के नियमित टीकाकरण एवं स्वच्छता को ले विशेष ध्यान देने की आवश्यकता: सीएस

पूर्णिया, बिहार दूत न्यूज।

शिशु मृत्यु दर के मामलों में कमी लाने एवं लगातार छः महीने तक नवजात शिशुओं के बेहतर देखभाल को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 15 से 21 नवंबर के बीच नवजात सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता था। लेकिन दीपावली और छठ महापर्व को लेकर 30 नवंबर तक विस्तारित किया गया है। जिसको लेकर अनुमंडलीय अस्तपाल के सभागार में पिरामल स्वास्थ्य की डीएमएसओ संध्या कुमारी के द्वारा प्रसव कक्ष की प्रभारी सहित स्टाफ नर्स और ममता को प्रशिक्षित किया गया। इस अवसर पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार, अस्पताल प्रबंधक विकल कुमार, पिरामल स्वास्थ्य की डीएमएसओ संध्या कुमारी सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे। जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यक्रम का आयोजन कर नवजात सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है। सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि जन्म के पहले 28 दिनों में नवजात मृत्यु के अधिकांश मामले घटित होते हैं। हाल के वर्षों में नवजात मृत्यु दर के मामलों में कमी आयी है। वर्ष 2019-20 में जारी एनएफएचएस 05 की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में नवजात मृत्यु दर शहरी क्षेत्र में 27.9 व ग्रामीण इलाकों में 35.2 के करीब है। इसलिये जोखिम के कारणों की पहचान, उसका उचित प्रबंधन नवजात मृत्यु दर के मामलों को कम करने के लिये जरूरी है। इसलिए नवजात के स्वास्थ्य संबंधी मामलों के प्रति व्यापक जागरूकता जरूरी है।

 

 

नवजात शिशुओं के नियमित टीकाकरण एवं स्वच्छता को लेकर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता: सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि प्री-मैच्योरिटी, प्रीटर्म, संक्रमण एवं जन्मजात विकृतियां नवजात शिशुओं की मृत्यु के मुख्य कारणों में से एक है। नवजात शिशुओं के स्वस्थ जीवन में नियमित टीकाकरण के अलावा स्वच्छता से संबंधित सभी तरह के मामलों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। सबसे अहम बात है कि शिशुओं के जन्म के एक घंटे बाद नवजात को मां का पहला गाढ़ा पीला दूध का सेवन अनिवार्य रूप से कराना होता है। नवजात शिशुओं को संभालने से पहले अपने हाथों की सफ़ाई जरूर करें। क्योंकि आपके हाथों की त्वचा पर कीटाणु और बैक्टीरिया रहते हैं। जिस कारण आपके बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता लड़ने के लिए पर्याप्त नहीं होती हैं। उचित पोषण के लिए छः महीने तक मां के दूध के अलावा किसी भी प्रकार के अन्य खाद्य पदार्थ के उपयोग से परहेज करना चाहिए। नवजात शिशुओं के वृद्धि एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए उचित पोषण सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संबंधी मामलों के प्रति व्यापक स्तर पर जागरूकता जरूरी है।

 

सामुदायिक-सुविधा सहभागिता के माध्यम से नवजात शिशु के जीवन का पोषण” थीम पर राष्ट्रीय नवजात सुरक्षा सप्ताह का किया जा रहा आयोजन: डीपीएम
जिला कार्यक्रम प्रबंधक सोरेंद्र कुमार दास ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 में “सामुदायिक-सुविधा सहभागिता के माध्यम से नवजात शिशु के जीवन का पोषण” की थीम पर राष्ट्रीय नवजात सुरक्षा सप्ताह का आयोजन ज़िले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में किया गया है। क्योंकि नवजात शिशुओं के जन्म के बाद पहले 28 दिन तक उसकी ज़िंदगी एवं विकास के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होते हैं। बचपन के किसी अन्य अवधि की तुलना में नवजात शिशुओं के मृत्यु की संभावना इस दौरान सबसे अधिक होती है। इसीलिए कहा जाता है कि नवजात शिशुओं की ज़िंदगी का पहला महीना आजीवन उसके स्वास्थ्य एवं विकास को लेकर निहायत ही जरूरी होता है।

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